Friday, March 6, 2026
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फर्जी अभिलेखों के सहारे बाहरी व्यक्ति को दिलाया आवास योजना का लाभ


◆ पट्टा देने की तैयारी में खुला पंचायत–ब्लॉक स्तर का खेल


◆ ग्रामीणों की शिकायत पर डीएम ने सौंपी जांच


@ लालमणि पाण्डेय लालू


अंबेडकर नगर। प्रधानमंत्री आवास योजना में लाभ दिलाने के लिए फर्जी अभिलेख तैयार करने का सनसनीखेज मामला विकास खंड कटेहरी के मरथुआ सरैया ग्राम पंचायत से सामने आया है। आरोप है कि बिहार प्रांत के एक मजदूर को स्थानीय अधिकारियों व कर्मचारियों की मिलीभगत से ग्राम पंचायत का निवासी दर्शाकर न सिर्फ सरकारी योजनाओं का लाभ दिलाया गया, बल्कि अब मामले को दबाने के लिए उसे पंचायत की भूमि पर आवासीय पट्टा देने की तैयारी भी की जा रही थी। इसी प्रक्रिया के दौरान पूरे फर्जीवाड़े की पोल खुल गई।

मरथुआ सरैया गांव के दर्जनों ग्रामीणों ने जिलाधिकारी से मिलकर पूरे मामले की लिखित शिकायत की। ग्रामीणों की ओर से रोहित पांडेय ने बताया कि बिहार के पूर्वी चंपारण जिले का निवासी नंदलाल कुछ वर्ष पहले मजदूरी के सिलसिले में गांव आया था। आरोप है कि इसी दौरान उसने स्थानीय कर्मचारियों से साठगांठ कर अपना नाम ग्राम पंचायत के परिवार रजिस्टर में दर्ज करा लिया। इसके बाद इसी आधार पर निवास प्रमाण पत्र, राशन कार्ड और मतदाता सूची में भी उसका नाम दर्ज करा दिया गया।

शिकायत के अनुसार वर्ष 2018-19 में इन्हीं कथित फर्जी अभिलेखों के आधार पर नंदलाल का नाम प्रधानमंत्री आवास योजना की सूची में शामिल कर लिया गया, जबकि उसके पास ग्राम पंचायत में न तो निजी भूमि थी और न ही स्थायी निवास। योजना के तहत उसे प्रथम किस्त की धनराशि भी निर्गत कर दी गई, जिसका कथित रूप से बंदरबांट हो चुका है।

ग्रामीणों का आरोप है कि मामले की निष्पक्ष जांच कर दोषियों पर कार्रवाई करने के बजाय संबंधित अधिकारी अपनी पूर्व की गलतियों को छिपाने के लिए उसे ग्राम पंचायत की भूमि पर आवासीय पट्टा देकर प्रकरण को रफा-दफा करना चाह रहे थे। इसकी जानकारी ग्रामीणों को तब हुई जब पट्टा देने के लिए गांव में भूमि की तलाश शुरू की गई।

ग्रामीणों ने स्पष्ट मांग की है कि किसी भी बाहरी व्यक्ति को ग्राम पंचायत की सरकारी भूमि का पट्टा न दिया जाए तथा यह जांच कराई जाए कि किसके आदेश और किन साक्ष्यों के आधार पर उसका नाम परिवार रजिस्टर, मतदाता सूची व अन्य अभिलेखों में दर्ज किया गया। साथ ही सड़क व नाले की भूमि पर किए गए कथित अवैध कब्जे को हटवाने की भी मांग की गई है।

मामले की गंभीरता को देखते हुए जिलाधिकारी ने जांच का जिम्मा उपजिलाधिकारी सदर को सौंप दिया है। जांच रिपोर्ट के आधार पर आगे की कार्रवाई किए जाने की बात कही गई है।

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