अयोध्या। केंद्रीय औद्योगिक सुरक्षा बल (सीआईएसएफ) के जवानों और अधिकारियों को मानसिक स्वास्थ्य के प्रति जागरूक करने के उद्देश्य से एयरपोर्ट परिसर स्थित सभागार में एक संवाद सत्र का आयोजन किया गया। इस अवसर पर जिला चिकित्सालय के मनोपरामर्शदाता डॉ. आलोक मनदर्शन ने तनाव प्रबंधन और मानसिक संतुलन बनाए रखने के व्यावहारिक उपायों पर विस्तार से प्रकाश डाला।
डॉ. मनदर्शन ने कहा कि सुरक्षाबलों पर सतत सतर्कता, दक्षता और अनुशासन बनाए रखने का विशेष दबाव रहता है। ऐसे में मानसिक रूप से शांत, संयमित और सक्रिय बने रहने के लिए गुणवत्तापूर्ण नींद को प्राथमिकता देना अत्यंत आवश्यक है। उन्होंने बताया कि नींद शरीर और मस्तिष्क की बैटरी को चार्ज करती है, जिससे तनाव कम होता है और नई चुनौतियों से निपटने की क्षमता विकसित होती है। इस प्रक्रिया को उन्होंने मानसिक प्रत्यास्थता (मेंटल रेजिलिएन्स) का आधार बताया।
उन्होंने बताया कि सेरोटोनिन, डोपामिन, एंडोर्फिन और ऑक्सीटोसिन जैसे ‘हैप्पी हार्मोन’ मस्तिष्क को सकारात्मक ऊर्जा प्रदान करते हैं और तनाव उत्पन्न करने वाले हार्मोन कोर्टिसोल व एड्रेनालिन के प्रभाव को कम करते हैं। पर्याप्त नींद और सकारात्मक मनोदशा से मानसिक लचीलापन बढ़ता है, जिससे दबाव सहने की क्षमता में वृद्धि होती है और शरीर व मस्तिष्क दोनों स्वस्थ रहते हैं।
डॉ. मनदर्शन ने यह भी कहा कि यदि अनिद्रा, तनाव या मानसिक उलझन दो सप्ताह से अधिक समय तक बनी रहे तो बिना संकोच मनोपरामर्श अवश्य लेना चाहिए। उन्होंने मानसिक स्वास्थ्य से जुड़ी भ्रांतियों और उदासीनता के प्रति भी सतर्क रहने की अपील की।
कार्यक्रम का आयोजन असिस्टेंट कमांडेंट रोहित ढाका के संयोजन में किया गया, जबकि सत्र की अध्यक्षता डिप्टी कमांडेंट रविंदर कुमार ने की। संवाद सत्र में सीआईएसएफ के अधिकारियों और जवानों ने सक्रिय सहभागिता करते हुए अपनी शंकाओं और समस्याओं पर खुलकर चर्चा की।