Saturday, March 7, 2026
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 डिजिटल ड्रग से बच्चे हो रहे हिंसक, मनोउपचार से सम्भव है पुनर्वास


अयोध्या। इन दिनों बच्चों व किशोरों  में हिंसक बगावत की बढ़ती मनोवृत्ति  के पीछे मोबाइल इंटरनेट लत है जिसे मनोविश्लेषण की भाषा में अब डिजिटल ड्रग कहा जाने लगा है क्योंकि इसके मनोदुष्परिणाम घातक नशीले पदार्थो जैसे होने लगे हैं। यह बातें जिला चिकित्सालय के  मनोपरामर्शदाता डॉ आलोक मनदर्शन ने बाल दिवस संदर्भित बाल मनोविकार विषयक वार्ता में कही।


डा आलोक मनदर्शन
मनो परामर्शदाता, जिला चिकित्सालय अयोध्या

डॉ मनदर्शन के अनुसार मोबाइल इंटरनेट की लत के चार प्रमुख लक्षण होतें हैं जिसमे पहला लक्षण मोबाइल या इंटरनेट में लिप्त रहना या उसी के ख्याल में खोए रहना है। दूसरा लक्षण औसत मोबाइल  समय का  बढ़ते रहना , तीसरा लक्षण अपनी तलब को रोक न पाना तथा चौथा लक्षण लत पूरी न हो पाने या उसमें रोक टोक या बाधा उत्तपन्न होने पर क्रोधित या हिसक हो जाना शामिल है। इनमें नशाखोरी, ऑनलाइन गेमिंग व गैंबलिंग की लत भी होती है जिसके आत्मघाती या परघाती परिणाम हो सकते है। एकांकीपन, आत्मविश्वास में कमी, आक्रोशित व्यवहार व अवसाद या उन्माद जैसी रूग्ण मनोदशा भी इनमें पायी जाती है। यही मनोविकृति और गंभीर रूप ले लेता है जिसे अपोजिशनल डिफायन्ट  डिसऑर्डर (ओडीडी ) कहा जाता है इसमें बड़ो द्वारा डांट फटकार की आक्रोशित प्रतिक्रिया घातक रूप में दिख सकती है।

उन्होंने बताया कि अभिभावक पाल्य की गतिविधियों पर मैत्रीपूर्ण व पैनी नजर रखे। पारिवारिक वातावरण को बेहतर बनाने की कोशिश करें तथा स्वस्थ मनोरंजक गतिविधियों को बढ़ावा दें। डिज़िटल डिटॉक्स और इंटरनेट फास्टिंग या मोबाइल से दूरी बनाने की मनोउपचार तकनीक से सुधार सम्भव है। गुमशुम,आक्रामक व अन्य असामान्य व्यवहार को नज़र अंदाज़ न करें तथा मनोपरामर्श लेने में देरी न करें।

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