Saturday, August 15, 2026
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गोस्वामी तुलसीदास का लोक चिंतन आज भी प्रासंगिक : डॉ. जनार्दन उपाध्याय


अवध विश्वविद्यालय में व्याख्यान कवि गोष्ठी का आयोजन


अयोध्या। श्रीराम मंगलावतार हैं और श्रीरामचरित मानस उनका ग्रंथावतार है यह विचार तुलसी साहित्य के मर्मज्ञ डॉ. जनार्दन उपाध्याय ने सोमवार को व्यक्त किए। वह डॉ. राममनोहर लोहिया अवध विश्वविद्यालय के अवधी भाषा विभाग, अखिल भारतीय साहित्य परिषद एवं अमर शहीद संत कंवरराम साहिब सिंधी अध्ययन केंद्र के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित व्याख्यान एवं कवि गोष्ठी में मुख्य वक्ता के रूप में बोल रहे थे। कार्यक्रम का विषय था गोस्वामी तुलसीदास का लोक चिंतन

सिंधी अध्ययन केंद्र सभागार में आयोजित इस कार्यक्रम में डॉ. उपाध्याय ने कहा कि गोस्वामी जी के साहित्य में कथा और काव्य दोनों का अद्भुत संगम है। कविता में बार-बार सुनने की लयात्मकता और कथा में आगे जानने की उत्सुकता—दोनों तत्व श्रीरामचरित मानस में जीवंत रूप से मिलते हैं। उन्होंने कहा कि गोस्वामी जी ने लोकभाषा में रचना कर जनमानस तक भगवान राम के लोकमंगलकारी स्वरूप को पहुंचाया।

व्याख्यान की भूमिका प्रस्तुत करते हुए प्रो. सत्य प्रकाश त्रिपाठी ने कहा कि तुलसीदास का काल विदेशी आक्रांताओं के शोषण और धर्मांतरण का समय था। ऐसे में उन्होंने अपनी रचनाओं के जरिए समाज में आशा, जागृति और सांस्कृतिक चेतना का संचार किया।

कार्यक्रम में अतिथियों का स्वागत डॉ. असीम त्रिपाठी और ज्ञानप्रकाश टेकचंदानी सरल ने किया। वाणी वंदना प्रो. लक्ष्मीकांत सिंह ने की। संचालन डॉ. प्रत्याशा मिश्र ने तथा धन्यवाद ज्ञापन राम प्रकाश त्रिपाठी ने किया। मौके पर कपिल कुमार, नीलम वरियानी, सीतू वरियानी समेत कई साहित्यप्रेमी उपस्थित रहे।

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