Tuesday, July 21, 2026
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बच्चों में टीबी की पहचान और इलाज पर चिकित्सकों की संगोष्ठी, 349 केस आए सामने


◆ गंभीर होता बाल क्षय रोग, गास्ट्रिक लावाज व प्रेरित थूक से किया जा रहा निदान


अयोध्या। जिले में बच्चों में बढ़ते टीबी (क्षय रोग) के मामलों को लेकर स्वास्थ्य महकमा अलर्ट मोड में आ गया है। इसी क्रम में जिला महिला अस्पताल के सभागार में गुरुवार को एक विशेष संगोष्ठी आयोजित की गई, जिसमें सरकारी व निजी चिकित्सकों ने एक मंच पर बैठकर बच्चों में टीबी के समय पर पहचान और समुचित उपचार पर चर्चा की। बैठक की अध्यक्षता जिला क्षय रोग अधिकारी डॉ. संदीप शुक्ला ने की। उन्होंने बताया कि जनवरी से जुलाई 2025 के बीच 0 से 14 वर्ष के 349 बच्चों में टीबी के मामले दर्ज किए गए, जिनमें से 48 का गास्ट्रिक लावाज और 6 का प्रेरित थूक विधि से नमूना लेकर जांच की गई।

डॉ. शुक्ला ने कहा, बच्चों में टीबी के लक्षण अक्सर सामान्य बीमारियों जैसे दिखते हैं, जिससे समय पर निदान में बाधा आती है। इसलिए प्राइवेट और सरकारी चिकित्सकों की भूमिका बेहद अहम हो जाती है। इस अवसर पर जिला अस्पताल के वरिष्ठ बाल रोग विशेषज्ञ डॉ. शिशिर श्रीवास्तव ने टीबी की पहचान के नवीन तरीकों, त्वरित उपचार की आवश्यकता और मजबूत केस फाइंडिंग जैसे विषयों पर व्याख्यान दिया। इस संगोष्ठी में इंडियन एकेडमी ऑफ पीडियाट्रिक्स (IAP) से जुड़े बाल रोग विशेषज्ञ भी शामिल हुए। विशेषज्ञों ने बताया कि टीबी का समय रहते इलाज न हो तो यह बच्चों के विकास पर गंभीर असर डाल सकता है।

बैठक का उद्देश्य सरकारी व निजी चिकित्सकों के बीच बेहतर तालमेल स्थापित करना और जिले में बच्चों को टीबी से सुरक्षित रखने के लिए ठोस रणनीति बनाना था। स्वास्थ्य विभाग को उम्मीद है कि इस पहल से जिले में बाल क्षय रोग के खिलाफ सुदृढ़ कदम उठाए जा सकेंगे और बच्चों का स्वास्थ्य और बेहतर किया जा सकेगा।

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