Thursday, July 23, 2026
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लाफ्टर की टोंन, बढ़ाती है हैप्पी-हार्मोन, बनावटी नही, बेबाक हंसी है लाभकारी


अयोध्या। जिला चिकित्सालय के मनोपरामर्शदाता डा आलोक मनदर्शन ने बताया कि हंसी-ठहाका मन का भोजन है तथा इसकी कमी मानसिक ,भावनात्मक व मनोशारीरिक समस्याओं को उत्प्रेरित कर सकती है। खुलकर हंसने से स्ट्रेस हार्मोन कोर्टिसाल कम तथा स्ट्रेस-रिलीवर हार्मोन इंडोर्फिन व मनोउमंग हार्मोन डोपामिन मे वृद्धि होती है। तनाव-युक्त भागदौड़ भरी दिनचर्या में कुछ पल हंसने की अनिवार्यता के प्रति जागरूकता पैदा करने के उद्देश्य से वर्ल्ड लाफ्टर-डे प्रतिवर्ष मई के प्रथम रविवार को मनाया जाता है जिसके शुरुवात डा मदन कटारिया द्वारा की गयी।

डा आलोक मनदर्शन

हंसी मनोतनाव को कम करने के साथ ही रोग प्रतिरोधक क्षमता मे वृद्धि, हृदय रोग, मधुमेह, उच्च रक्तचाप, सांस-रोग, अवसाद, चिंता-विकार, अल्ज़ाइमर्श, चर्मरोग व साइकोसोमैटिक डिसऑर्डर आदि के इलाज में बड़ा सहायक है। हर दिन 10 से 15 मिनट की हंसी अतिआवश्यक है। कॉमेडी-शो व सोशल-मीडिया के हास्यप्रद कंटेंट की बढ़ती लोकप्रियता इसका सटीक उदाहरण है। इंसान ही नही, उच्च समझ वाले जानवर भी हंसते हैं, जिनमें चूहें, बंदर व गोरिल्ला व चिंपांजी की प्रजातियां प्रमुख हैं


बनावटी नही, बेबाक हंसी है लाभकारी


स्पॉनटेनियस या बेबाक हंसी ब्रेन के एमिगडाला और हाइपोथैलेमस हिस्से जुड़े होते हैं जो इमोशन्स को कंट्रोल करते हैं तथा मनोआनंद देते है, वहीं दूसरी तरफ सोशल-हंसी या बनावटी-हंसी में
किसी की बात मजेदार न लगने पर भी कृत्रिम रूप से हंसना या हंसने का अभिनय करना मनोतनाव का कारक बनता है ,क्योंकि हम व्यक्ति विशेष को नाराज या असहज नहीं करना चाहते हैं। इसमें ब्रेन का सेरेब्रल कॉर्टेक्स जुड़ा होता है जो विचारों को कंट्रोल करता है तथा इससे आनंद की बजाय घुटन महसूस होती है।

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