टकटकी लगाए राम भक्तों का रोम रोम पुलकित हो उठा। मंदिर में उपस्थित भक्तों की भारी भीड़ ने इस अविस्मरणीय पल की यादों को सहेजने में लगी थी। अपने घरों में टीवी के सामने बैठे लोगों इस दृश्य को देख भाव विभोर हो गए। श्रीराम नवमी पर पूरी रामनगरी दुल्हन की तरह सजी-सवंरी व निखरी थी। शताब्दियों के संघर्ष के बाद हमारे आराध्य का अपने जन्म स्थान विराजमान होने के बाद यह पहला जन्मोत्सव है।
सूर्य किरणों से भगवान के मस्तक का अभिषेक इतना आसान नही थी। पृथ्वी की गति के व सूर्य दिशा की गणना करके उपरी तल से राम लला के ललाट तक सूर्य किरणों को पहुंचाना था। वैज्ञानिक सफल हुए और 75 मिलीमीटर टीके के रूप में सूर्य किरणें राम लला के ललाट तक पहुंची। रामलला के जयकारों के बीच आरती संपन्न हुई। विशेष रूप से तैयार कराया गया धनिया की पंजीरी समेत अन्य प्रसाद बांटा गया। श्रीराम लला को भी छप्पन भोग लगाया गया।
अयोध्या नगरी श्री राम की भक्ति में लीन दिखाई दी। जगह-जगह भक्त सोहर व बधाई गाते भक्त अपने आराध्य की भक्ति में लीन नजर आए। कनक भवन व श्रीराम जन्मभूमि परिसर स्थित मंदिर सहित अयोध्या के मठ मंदिरों में राम जन्म के साथ ही घंटा-घड़ियाल बजने लगा । चारों तरफ “भये प्रगट कृपाला, दीनदयाला कौशल्या हितकारी“ “जन्मे हैं अवध में रघुराई अवध में बाजी बधाई“ की ध्वनि से पूरी अयोध्या गुंजायमान हो उठी।