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♦ पुराणों में भी मिलता है उल्लेख


♦ अयोध्या की ग्राम देवी है माता छोटी देवकाली 


(Ayodhya 21 Oct),   सीताराम विवाहोपरांत श्री सीता जी अपने साथ सर्वमंगला पार्वती के विग्रह को अयोध्या लेकर आईं। जिसे राजा दशरथ ने सप्तसागर के ईशानकोण पर भव्य मंदिर का निर्माण कर ईशानी देवी के नाम से श्री पार्वती को स्थापित किया। जहां माता सीता के द्वारा नित्य पूजन किया जाता रहा। पौराणिक आख्यानों में अत्रि संहिता के मिथिला खंड में मिथिला की ग्राम देवी के रूप में उनका उल्लेख है। तथा अयोध्या में भी ग्राम देवी का स्थान मिला। 
धार्मिक मान्यता है कि लक्ष्मीस्वरूपा माता सीता जी नित्य निज निवास कनक भवन से आकर माॅ छोटी देवकाली का पूजन करती थीं। महर्षि वेदव्यास ने रुद्रयामल तंत्र व स्कंदपुराण में ईशानी देवी के नाम से छोटी देवकाली मंदिर का वर्णन किया है। स्कंदपुराण में ’विदेह कुलदेवी च सर्वमंगलकारिणी  श्लोक में इसका उल्लेख है। इस श्लोक में विस्तार से बताया कि इन सर्वमंगलकारिणी, स्कंदमाता, शिवप्रिया भवानी का पूजन करने से समस्त प्रकार के इष्ट पूरे होते हैं। रुद्रयामल तंत्र में श्री सीता द्वारा प्रतिदिन छोटी देवकाली मंदिर में पूजन का उल्लेख हैं। 


चीनी यात्री ह्वेनसांग के अनुसार 


अयोध्या यात्रा के दौरान छोटी देवकाली मंदिर से प्रभावित हुआ। उसने लिखा है कि इस मंदिर में पहुंचकर उसे जितनी शांति व लोकोत्तर आनंद का अनुभव हुआ, उसे शब्दों में व्यक्त करना कठिन है। 


कनिंघम, विस्मार्क व फाह्यान आदि अनेक विदेशी पर्यटकों ने भी इस मंदिर का उल्लेख कर उसकी महत्ता का वर्णन किया है। 


साधकों का अनुभव है कि इस मंदिर में किया गया जप,तप, हवन व अनुष्ठान शीघ्र फलदाई होता है। माता के दर्शन मनुष्य को सभी मनोवांछित फल की प्राप्ति होती है। तथा उसका जीवन सुखमय हो जाता है। भक्त कहते हैं कि निरंतर छह माह तक इस मंदिर में दर्शन करने से मनोकामनाएं पूरी हो जाती हैं। माता छोटी देवकाली का स्थान अयोध्या के प्रमुख पौराणिक स्थान में से एक है। अयोध्या तथा आस पास के क्षेत्रों में परम्परा के अनुसार विवाह के बाद वर-वधुओं को भगवान राम की कुलदेवी के साथ यहां का भी दर्शन करवाया जाता है।