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Photo Caption: Clipart :: Photo Grapher : Ayodhya Samachar
फैजाबाद। मौजूदा दौर की सतही पढाई का नतीजा है कि बहुतायत लोग अज्ञानता की ओर बढते जा रहे है। आम लोगो की बात दूर देश और समाज के लिए जूझने का दावा करने वाली सियासी पार्टियों की बहुतायत कारकूनों को अपने ही दल के पुरखों की जानकारी नहीं है। नगर के विभिन्न मोहल्लों मंे मौजूद यहां के पूर्व सांसदों और विधायकों के घरों के बारे में भी लोग अनजान है। राजनीति में वर्तमान को तसल्ली के सहारे आगे बढाने की शैली का नतीजा है कि कार्यकर्ता कूप मंडूक के दायरे से उबर नहीं पा रहे है। राजनीति से जुड़े लोग ही जब अपने पुरखों का जिक्र नहीं करते तो आम लोग या नई पीढ़ी जाने कैसे। भारतीय जनता पार्टी के अनेक युवा कार्यकर्ताओं से बात की गयीे तो पता चला कि जनसंघ पार्टी से पहली बार अयोध्या क्षेत्र से चुने गये विधायक डा बृजकिशोर के बारें में लोग नहीं जानते। झारखंडी स्थित उनके आवास से भी लोग अनजान है। 1974 में अयोध्या क्षेत्र से जनसंघ से ही दूसरे विधायक चुने गये वेद प्रकाश अग्रवाल के बारें में बहुतायत लोग नहीं जानते। झारखंडी स्थित उनके आवास के बारें में लोग अनजान है। जनसंघ के आखिरी व जनता पार्टी के प्रथम अध्यक्ष रहे बाबू जगदम्बा प्रसाद वैद्य के बारें में लोग नहीं जानते। फतेहगंज के पीछे स्थित उनके आवास के बारें में लोगो को पता नहीं है। जनता पार्टी में शामिल जनसंघ के घटक के बाबू मधुबन सिंह एमएलसी थे इसकी भी सुधि लोगो को नहीं है। समाजवादी पार्टी के कार्यकर्ता मौजूदा समाजवादी पार्टी और तत्कालीन सोशलिस्ट पार्टी का अंतर नहीं जानते। बीती चार अगस्त को पुराने सोशलिस्ट समाजवादियों का लखनऊ में सम्मान समारोह आयोजित था। मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने देश भर के सोशलिस्टों को सम्मानित किया। इसके लिए जिले से 13 लोगो के नाम थे। कार्यक्रम में शामिल होने के लिए समाजवादी पार्टी के पुराने लोगो की सूची मांगी गयी तो लगभग चालीस लोगो के नाम की सूची भेजी गयी। हालांकि लखनऊ में छानबीन होने के बाद संयुक्त सोशलिस्ट पार्टी से या प्रज्ञा सोशलिस्ट पार्टी से 1974 से पहले जुड़े रहे लोगो के नाम ही चयनित हुए। समाजवार्दी पार्टी की नयी पौध चैधरी सिब्ते मोहम्मद नकवी के बारें नहींे जानती। जनता पार्टी के बाद यहां के सांसद रहे डा लोहिया के समय के नेता अनंत राम जायसवाल के बारें में नहीं जानती । समाजवादी कुनबा बाबू सर्वजीत लाल वर्मा, रमानाथ मेहरोत्रा, इन्द्रसेन सिंह बाबू, त्रिलोकीनाथ श्रीवास्तव, हरिशंकर साहू, अब्दुल्ला, कन्धईलाल, जगन्नाथ सोनकर, मो शमीम एडवोकेट, मो हई खां एडवोकेट आदि के बारें में कोई नहींे जानता। नौबत यह कि 1957 आजाद भारत के दूसरें सांसद रहे पं राजाराम मिश्र के बारें तथा सिविल लाईन स्थित उनके आवास के बारें में दूर की छोड़िये उनके मोहल्ले के लोग ही नहीं जानते। यही हाल 1962 में सांसद रहे बाबू बृजवासी लाल तथा उनके बल्लाहाता स्थित आवास का भी है। 1967 व 1971 दो बार लोक सभा का चुनाव जीतकर लगातार दशक भर सांसद रहे रामकृष्ण सिन्हा के बारें में तथा साहबगंज स्थित उनके आवास के बारें मंे आम लोग अनजान है। सामान्य लोगो की बात छोड़िये सम्बंधित राजनीतिक दलों के युवा कार्यकार्ता भी पुरखांे के बारें में नहीं जानते है। वर्ष 1978 पहले की अयोध्या व फैजाबाद की नगर पालिका के अध्यक्ष रहे बाबू महेन्द्र चंद कपूर व उनके महाजनी टोला तिराहा स्थित आवास के बारें में आम लोग नहीं जानते। जबकि कपूर साहब के अध्यक्ष काल में राममंदिर आन्दोलन के शलाका पुरुष कहलाए परमहंस रामचंद्र दास सभासद हुआ करते थे। अयोध्या नगर पालिका के वजूद में आने के बाद वे अध्यक्ष चुने गये। तत्समय के जनसंघ के नेताओं में शुमार अवधेश दास शास्त्री के बारें में लोग नहीं जानते।