• Home
  • |
  • Contact Us- 9454800865, 9454853267
  • |


हाथ भागवत गीता, चेहरे में मुस्कान, मात्र 19 वर्ष उम्र में फांसी चढ़ गये खुदीराम बोस



मरने के बाद भी अंग्रेजो में कायम रहा खुदीराम का डर, भयवश अंग्रेजी मजिस्ट्रेट किंग्जफोर्ड ने छोड़ी नौकरी



(Ayodhya, 11 Aug), यहां शहीदो की पावन गाथाओं को अपमान मिला, डाकू ने खादी पहनी तो संसद में सम्मान मिला। हम अगर वर्तमान शिक्षा प्रणाली पर नजर डाले तो डा हरिओम पवार की यह कविता एक चरितार्थ होती है। गुलाम भारत और एक 19 साल का बालक। जिसको ब्रिटिश हकूमत ने फांसी दे दी। जिसकी दहशत मौत के बाद भी कायम रही। खुदीराम के विचार कई और खुदीराम न पैदा कर दे इस डर के कारण अंग्रेजी मजिस्ट्रेट किंग्जफोर्ड ने नौकरी छोड़ दी। वर्तमान पीढ़ी को खुदीराम बोस के विषय में जानकारी ही नहीं है।

                        1905 में लार्ड कर्जन के द्वारा बंगाल विभाजन किये जोन पर स्वतंत्रता संग्राम सेनानियों ने इसका विरोध किया। विरोध कर रहे सेनानियों को तत्सम कलकत्ता के मजिस्ट्रेट किंग्जफोर्ड ने बेहद कड़ा दण्ड दिया। कांतिकारियों ने इसका बदला लेने की ठानी। जिम्मेदारी खुदीराम बोस व प्रफुल्ल कुमार चाकी को दी गयी। खुदराम बोस व प्रफुल्ल चाकी ने किंग्जफोर्ड की निगरानी की। उन्होने उसकी बग्घी तथा उसके घोड़े का रंग भी देख लिया।

                        30 अप्रैल को दोनो किंग्जफोर्ड के बंगले के बाहर खड़े होकर उनका इंतजार करने लगे। इसी बीच किंग्जफोर्ड की बग्घी के जैसी दिखनी वाली बग्घी बाहर आयी। खुदीराम ने अंधेरे में जोर से बम फेका। संयोग से इस बग्घी में दो यूरोपियन महिलाए बैठी थी। किसी कारण से किंग्जफोर्ड ने बाहर आने के अपने कार्यक्रम में परिवर्तन किया था। बम विस्फोट में दोनो महिलाओं की मौत हो गयी। धमाका करने के बाद खुदीराम बोस व प्रफुल्ल कुमार भागते हुए घटनास्थल से 24 मील दूर स्थित वैली रेलवे स्टेशन पर पहंचे जहां अंग्रेज पुलिस ने उन्हें घेर लिया। अपने को घिरा देखकर कर प्रफुल्ल कुमार चाकी ने स्वयं को गोली मार ली। वहीं अंग्रेजो से मुकाबला करते हुए खुदीराम बोस जिंदा पकड़ लिये गये। 11 अगस्त 1908 को मुजफ्फरपुर जेल में उन्हे फांसी दे दी गयी। हाथ में भागवत गीता लेकर खुदीराम बोस खुशी खुशी फांसी के तख्ते पर चढ़ गये। खुदीराम बोस द्वारा फेंके बम की गूंज यूरोप तक सुनायी दी। मौत के बाद बंगाल में खुदीराम बोस की लोकप्रियता को देखकर किंग्जफोर्ड ने नौकरी छोड़ दी।