एजुकेशन और इंडस्ट्री के समन्वय पर रहा ज़ोर, युवाओं को बना सके शिक्षित और सक्षम
अयोध्या। अवध विश्वविद्यालय, अयोध्या एवं आचार्य नरेंद्र देव कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय, कुमारगंज के संयुक्त तत्वावधान में स्वामी विवेकानंद सभागार में ‘विकास 2025’ विषय पर एक दिवसीय यूजीसी प्रायोजित राष्ट्रीय कॉन्फ्रेंस का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में शिक्षा, उद्यमिता, कौशल विकास और रोजगार को लेकर विशेषज्ञों, शिक्षाविदों और नीति-निर्माताओं ने विचार साझा किए।
कॉन्फ्रेंस का उद्घाटन यूजीसी के पूर्व चेयरमैन प्रो. एम. जगदीश कुमार ने किया। उन्होंने कहा कि शिक्षा को डिग्री तक सीमित रखने के बजाय उसे कौशल और उद्यम के साथ जोड़ा जाना चाहिए। इंडस्ट्री और शिक्षण संस्थानों के बीच समन्वय से ही छात्रों को व्यवहारिक ज्ञान और रोजगार मिल सकेगा। उन्होंने कहा कि नेशनल क्रेडिट फ्रेमवर्क के तहत छात्रों को कम से कम 50 प्रतिशत प्रैक्टिकल से जोड़ा जाए।
कॉन्फ्रेंस के समापन सत्र में उत्तर प्रदेश सरकार के कृषि मंत्री सूर्य प्रताप शाही ने ऑनलाइन संबोधन में कहा कि नई शिक्षा नीति देश की मानव पूंजी को सशक्त बनाएगी। उन्होंने कहा कि शिक्षा के साथ उद्यम को जोड़कर युवा स्वयं रोजगार सृजन करें, यही आज की आवश्यकता है।
उच्च शिक्षा राज्य मंत्री रजनी तिवारी ने कहा कि उत्तर प्रदेश संकल्प से सिद्धि की ओर बढ़ रहा है। नई शिक्षा नीति दूरदृष्टिपूर्ण है और युवाओं को शिक्षित ही नहीं, बल्कि आत्मनिर्भर और उद्यमशील भी बनाएगी।
यूजीसी के सचिव डॉ. मनीष जोशी ने कहा कि शिक्षा व्यवस्था को समय के साथ बदला जाना चाहिए और कृषि अनुसंधान जैसे क्षेत्रों में नवाचार को बढ़ावा दिया जाना चाहिए।
शैक्षिक विमर्श सत्र में यूजीसी के उपाध्यक्ष प्रो. दीपक कुमार श्रीवास्तव ने कहा कि शिक्षा और रोजगार के बीच के मिसमैच को नई शिक्षा नीति दूर कर रही है। विश्वविद्यालयों को अपने अलुमनी नेटवर्क को मजबूत कर रोजगार के अवसर बढ़ाने चाहिए।
एनसीवीटी अध्यक्ष एवं पूर्व आईएएस प्रो. निर्मलजीत सिंह कलसी ने कहा कि देश में 25 करोड़ स्कूली बच्चों में से केवल 4 करोड़ ही उच्च शिक्षा तक पहुंचते हैं, जिनमें अधिकांश अकुशल रह जाते हैं। विश्वविद्यालयों को नई शिक्षा नीति के सभी 16 कंपोनेंट को अपनाना चाहिए।
कॉन्फ्रेंस में कुलपति कर्नल डॉ. बिजेंद्र सिंह ने कहा कि शिक्षा को नवाचार और स्थानीय उद्योगों से जोड़ना होगा ताकि युवाओं के लिए नए अवसर उत्पन्न हों। उन्होंने कहा कि छात्रों को माइंडसेट बदलकर नौकरी खोजने की बजाय स्वयं रोजगार सृजन की दिशा में अग्रसर होना चाहिए।
कॉन्फ्रेंस के विभिन्न सत्रों को गुरु घासीदास विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. आलोक चक्रवाल, स्ट्रैटेजिक सलाहकार श्रीयोगी श्रीराम, प्रो. विमल राह, प्रो. यशवंत सिंह, प्रो. सिद्धार्थ शुक्ला, प्रो. हिमांशु शेखर, प्रो. अनूप कुमार, प्रो. आशुतोष सिंह, प्रो. शैलेंद्र कुमार वर्मा आदि ने भी संबोधित किया।
कार्यक्रम का संचालन प्रो. नीलम पाठक ने किया तथा धन्यवाद ज्ञापन कॉन्फ्रेंस संयोजक प्रो. एस.एस. मिश्र व यूजीसी के संयुक्त सचिव डॉ. अभिषेक कपूर ने किया। इस अवसर पर यूजीसी की अवर सचिव वीना मेनन, डॉ. राधिका, कुलसचिव विनय कुमार सिंह, वित्त अधिकारी पूर्णेन्द्र शुक्ला, प्रो. संजय पाठक सहित बड़ी संख्या में शिक्षक, शोधार्थी एवं प्रतिभागी उपस्थित रहे।