तम्बाकू के सेवन से ब्रेन न्यूक्लियस में हैप्पी हार्मोन डोपामिन की बाढ़ आ जाती है और मस्ती का एहसास होने लगता है। फिर डोपामिन का स्तर सामान्य होने पर हिप्पोकैम्पस द्वारा डोपामिन की तलब पैदा होती है। जिसे निकोटिन डिपेंडेंस भी कहा जाता है। इस प्रकार नशे की मात्रा बढ़ती जाती है। जिसे निकोटिन टोलेरेन्स कहा जाता है। मनोविकार से ग्रसित या नशे की पारिवारिक पृष्ठभूमि या मित्रमण्डली से सरोकार के टीनेज में यह अधिक होता है। एक स्टडी के अनुसार, दो तिहाई तंबाकू यूजर्स की लत किशोरवस्था में ही शुरु होती है।