अयोध्या। एसआईआर (स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन) को लेकर सियासी घमासान तेज हो गया है। समाजवादी पार्टी ने प्रक्रिया में बड़े पैमाने पर गड़बड़ी का आरोप लगाते हुए निष्पक्षता पर सवाल खड़े किए हैं। पार्टी का दावा है कि एसआईआर फॉर्म भरने के बावजूद बड़ी संख्या में मतदाताओं के नाम मतदाता सूची से काट दिए गए हैं।
सपा नेता व पूर्व राज्य मंत्री पवन पांडे ने बुधवार को आयोजित प्रेस वार्ता में कहा कि बूथ लेवल अधिकारी (बीएलओ) समय से मतदाताओं को नोटिस नहीं दे रहे हैं, जिससे उन्हें अपना पक्ष रखने और आवश्यक दस्तावेज प्रस्तुत करने का अवसर नहीं मिल पा रहा है। उन्होंने आरोप लगाया कि कई मामलों में बीएलओ बिना उचित सूचना के ही नाम हटाने की कार्रवाई कर रहे हैं।
पूर्व मंत्री ने यह भी कहा कि मतदाता सत्यापन के दौरान कई एआरओ निवास प्रमाण पत्र को मान लिया जा रहा है, तो कहीं उसी प्रकार के प्रमाण पत्र के लिए मतदाताओं को तहसील के चक्कर लगाने पड़ रहे हैं। उन्होंने तहसीलदार फैजाबाद पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि वह एक विशेष दल के पक्ष में काम कर रहे हैं और अपनी ही तहसील द्वारा जारी किए गए प्रमाण पत्रों पर आपत्ति जता रहे हैं। पवन पांडे ने जिलाधिकारी अयोध्या से मांग की कि तहसीलदार फैजाबाद को तत्काल पद से हटाया जाए।
उन्होंने निर्वाचन आयोग से मांग किया कि बीएलओ घर-घर जाकर मतदाताओं को नोटिस उपलब्ध कराएं, ताकि कोई भी पात्र मतदाता अपने मताधिकार से वंचित न हो पाए। पवन पांडे ने आरोप लगाया कि यह पूरी प्रक्रिया लोकतंत्र के उत्सव में आम जनता को मतदान से दूर रखने की साजिश है और बीएलओ भाजपा के एजेंट की तरह काम कर रहे हैं।
पूर्व मंत्री ने दावा किया कि ऐसे कई मतदाता हैं जिनके नाम वर्ष 2003 से मतदाता सूची में दर्ज हैं और जिन्होंने वर्ष 2024 के लोकसभा चुनाव में मतदान भी किया, फिर भी उनके नाम सूची से हटा दिए गए। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि जल्द सुधार नहीं हुआ तो समाजवादी पार्टी सड़क से सदन तक आंदोलन करेगी।