◆ विभागाध्यक्षों की शिकायतों के बाद हुई कार्रवाई, नए प्रिसिंपल की तैनाती
अयोध्या। राजर्षि दशरथ मेडिकल कॉलेज के तत्कालीन प्रिसिंपल डॉ. सत्यजीत वर्मा के खिलाफ लंबे समय से चली आ रही शिकायतों का अंततः असर दिखाई दिया है। छह विभागाध्यक्षों द्वारा लगाए गए गंभीर आरोपों और शासन स्तर पर कराई गई जांच के बाद डॉ. सत्यजीत वर्मा को महानिदेशक चिकित्सा शिक्षा एवं प्रशिक्षण, लखनऊ कार्यालय से सम्बद्ध कर दिया गया है। उनके स्थान पर राजकीय मेडिकल कॉलेज कन्नौज में कम्युनिटी मेडिसिन विभागाध्यक्ष डॉ. दिनेश सिंह मर्तोलिया को राजर्षि दशरथ मेडिकल कॉलेज का नया प्रिसिंपल नियुक्त किया गया है।
जानकारी के अनुसार, नौ सितंबर को कॉलेज के छह विभागाध्यक्षों ने प्रमुख सचिव को पत्र भेजकर प्रिसिंपल पर प्रशासनिक अनियमितताओं और कार्यशैली को लेकर गंभीर आरोप लगाए थे। इन शिकायतों को संज्ञान में लेते हुए शासन द्वारा एक जांच समिति गठित की गई, जिसने 27 दिसंबर को मेडिकल कॉलेज पहुंचकर निरीक्षण और दस्तावेजों की जांच की।
मामले ने तब और गंभीर रूप ले लिया, जब कॉलेज परिसर में एमबीबीएस प्रथम वर्ष के एक छात्र की संदिग्ध परिस्थितियों में हुई मौत के बाद मृतक छात्र के पिता ने लोकायुक्त के समक्ष भी शिकायत दर्ज कराई। लोकायुक्त के निर्देश पर प्रमुख सचिव को तीन सदस्यीय जांच समिति गठित करने के आदेश दिए गए थे।
12 जनवरी को प्रभारी मंत्री सूर्य प्रताप शाही द्वारा किए गए निरीक्षण के दौरान भी कॉलेज की व्यवस्थाओं पर सवाल खड़े हुए। निरीक्षण के समय चिकित्सकों और मेडिकल स्टाफ की समय से अनुपस्थिति पर नाराजगी जताई गई थी। इसके अलावा इलाज में लापरवाही, संसाधनों के दुरुपयोग और मरीजों को समुचित सुविधाएं न मिलने को लेकर तीमारदारों की शिकायतें लगातार सामने आ रही थीं।
बताया जाता है कि अपने खिलाफ लगातार सामने आ रही शिकायतों के बावजूद तत्कालीन प्रिसिंपल ने इन मामलों को गंभीरता से नहीं लिया, जिसका परिणाम प्रशासनिक कार्रवाई के रूप में सामने आया।
विभागाध्यक्षों ने लगाए थे गंभीर आरोप, डीजीएमई की टीम ने की जांच
विभागाध्यक्षों द्वारा की गई शिकायत में नॉन-मेडिकल और अयोग्य फैकल्टी की तैनाती, एनएमसी मानकों के विपरीत नियुक्तियां, कॉलेज परिसर में दलालों की सक्रियता, चिकित्सकों और कर्मचारियों की अनुपस्थिति को बढ़ावा देना, धनउगाही तथा क्रय संबंधी कार्य विभागाध्यक्षों और क्रय समिति की बैठक के बिना कराए जाने जैसे आरोप शामिल थे। शिकायत पत्र में एमबीबीएस प्रथम वर्ष के छात्र की संदिग्ध मौत का भी उल्लेख किया गया था। इन्हीं आरोपों की जांच के लिए 27 दिसंबर को डीजीएमई के अपर निदेशक आलोक कुमार, संयुक्त निदेशक सचिन कुमार और डॉ. श्रीश सिंह की टीम ने कॉलेज का निरीक्षण किया था।
निरीक्षणों में बार–बार उजागर हुई थीं खामियां
मेडिकल कॉलेज की कार्यप्रणाली को लेकर पूर्व में भी कई बार सवाल उठते रहे हैं। विभिन्न निरीक्षणों में ओपीडी व्यवस्था, वार्डों की साफ-सफाई, चिकित्सकों की नियमित उपस्थिति, मरीजों को समय पर उपचार न मिलना और प्रशासनिक नियंत्रण की कमी जैसी खामियां सामने आई थीं। इन्हीं कमियों के चलते कॉलेज की छवि प्रभावित होती रही है।
शिकायतों के चलते पहले भी हटाए जा चुके हैं प्रिसिंपल
राजर्षि दशरथ मेडिकल कॉलेज बीते कुछ वर्षों से विवादों और शिकायतों के कारण सुर्खियों में रहा है। डॉ. सत्यजीत वर्मा से पहले प्रिसिंपल रहे डॉ. ज्ञानेन्द्र कुमार को भी शिकायतों और जांच के चलते 16 जनवरी 2025 को महानिदेशक चिकित्सा शिक्षा एवं प्रशिक्षण, लखनऊ कार्यालय से सम्बद्ध किया गया था। उनके बाद डॉ. सत्यजीत वर्मा को कॉलेज की जिम्मेदारी दी गई थी, लेकिन अब उन्हें भी इसी तरह की कार्रवाई का सामना करना पड़ा है।