◆ अतिक्रमण को लेकर सख्त हुए नगर पंचायत अध्यक्ष ओमकर गुप्ता को अतिक्रमणकरियों एवं विरोधियों के कुचक्र साजिश का भी करना पड़ा है सामना
@ महेंद्र मिश्रा
अंबेडकर नगर। शासकीय एवं सार्वजनिक भूमि को अवैध अतिक्रमण मुक्त करने के सर्वोच्च न्यायालय के साथ-साथ प्रदेश सरकार की जीरो टॉलरेंस की नीति को जिला प्रशासन आइना दिखा रहा है। जिससे आक्रोशित लोगों के द्वारा नगर पंचायत अशरफपुर किछौछा क्षेत्र में शासकीय भूमि व सार्वजनिक भूमि पर अवैध अतिक्रमण को लेकर कार्रवाई की मांग भी उठने लगी है। न्यायालय एवं सरकार का स्पष्ट निर्देश है कि जिला व स्थानीय प्रशासन सरकारी भूमि पर हुए अवैध कब्जे को चिन्हित कर प्रशासन उस पर बेदखली की कार्रवाई सुनिश्चित करें। लेकिन नगर पंचायत अशरफपुर किछौछा में सरकारी जमीनों पर किए गए अवैध अतिक्रमण को लेकर की गई शिकायत के बावजूद भी जिला प्रशासन अवैध अतिक्रमण हटाने के मामले में कुंभकरणी नींद सो रहा है। सरकारी जमीनों पर भूमाफियाओं के द्वारा किए गए अवैध कब्जे को लेकर कई शिकायतें भी आईजीआरएस पोर्टल पर की गई। लेकिन आरोप है कि अतिक्रमणकारियों को चिन्हित कर उन पर कार्रवाई करने के बजाय संबंधित कर्मचारी व अधिकारी गलत रिपोर्ट प्रेषित कर अपने कर्तव्य की इतिश्री कर रहे हैं। चर्चा है कि इन कर्मचारियों एवं अधिकारियों के गलत रिपोर्ट लगाने के पीछे लक्षमिना का प्रभाव माना जा रहा है। इतना ही नहीं सरकारी जमीनों पर नकली कब्र बनाकर आने वाले जायरीनों को गुमराह कर अवैध वसूली करने का गोरख धंधा भी नगर पंचायत अशरफपुर किछौछा क्षेत्र में तेजी के साथ फल फूल रहा है।अभी हाल ही में आइजीआरएस पोर्टल पर नगर पंचायत असरापुर किछौछा निवासी नूरुद्दीन अशरफ ने जिलाधिकारी को संबोधित करते हुए दिए गए शिकायती पत्र में आरोप लगाया कि नगर पंचायत क्षेत्र में कुछ तरकशकाश गोल बंद किस्म के लोगों के द्वारा गाटा संख्या 00 671व गाटा संख्या 813 में स्थित शासकीय भूमि पर नकली मजार व अवैध दुकान बनाकर अवैध वसूली करने का गोरख धंधा तेजी से फल फूल रहा है। जनहित में अवैध रसूली को रोकना और शासकीय भूमि से अवैध अतिक्रमण मुक्त करना जरूरी है। शिकायत के बावजूद भी राजस्व विभाग के कर्मचारी शासकीय भूमि पर हुए अवैध अतिक्रमण को लेकर गंभीर नहीं है। जिसका नतीजा है कि शिकायतों पर अपनी रिपोर्ट प्रेषित कर राजस्व विभाग के कर्मचारी अधिकारी शासन व न्यायालय को गुमराह कर रहे हैं। वही दूसरी तरफ नगर पंचायत पर क्षेत्र में 33 बीघा जमीन कब्रिस्तान के लिए चिन्हित की गई है। इसके कुछ हिस्सों पर अवैध अतिक्रमणकारियों ने अवैध कब्जा करते हुए बड़ी-बड़ी बिल्डिंग,खानकाह एवं नकली कब्र बनाकर आने वाले श्रद्धालुओं को गुमराह करते हुए उनसे अवैध वसूली कर रहे हैं। और कब्रिस्तान की जमीन की आड़ में शासकीय एवं बंजर भूमि पर कब्जा करने के लिए नए-नए हथकंडे अपना रहे हैं। न्यायालय व शासन की मंशा के अनुरूप अवैध अतिक्रमणकारियों के मंसूबों को असफल करने के लिए नगर पंचायत अध्यक्ष ओंमकार गुप्ता तालाब, बंजार, चकरोड, सार्वजनिक एवं शासकीय भूमि पर हुए अतिक्रमण को लेकर अपना रूख कड़ा किए हुए थे। जो इन अवैध अतिक्रमणकारियों के साथ-साथ जिले व तहसील के प्रशासन और कुछ सत्ता पक्ष के नेताओं को भी नागवार लगने लगा। जिसका परिणाम रहा कि नगर पंचायत अध्यक्ष ओमकार गुप्ता के विरुद्ध इन सभी लोगों ने प्रत्यक्ष व अप्रत्यक्ष रूप से कुचक्र रचने की कवायद शुरू कर दी।आइजीआरएस, एससी एसटी, निर्वाचन याचिका जैसे तमाम कानूनी दांव पेंच खेलते हुए अवैध अतिक्रमणकारियों व विरोधियों ने अवैध वसूली व चंदे से जुटाई गई भारी भरकम रकम खर्च कर स्थानीय प्रशासन एवं न्यायालय को गुमराह करते हुए उन्हें परेशान करने के लिए सक्रिय हों गये। निर्वाचन याचिका को लेकर इन विरोधियों ने एक डमी प्रत्याशी को मोहरा बनाकर नगर पंचायत अध्यक्ष का चुनाव रद्द करने के लिए एक याचिका दाखिल की थी। कानून के जानकारो की राय माने तो नियमता उस याचिका को जनपद न्यायालय के द्वारा खारिज कर देना चाहिए था। लेकिन बीते 15 नवंबर को न्यायालय के द्वारा 2023 में हुए नगर पंचायत के चुनाव को रद्द कर दिया गया। जिस निर्णय के विरुद्ध नगर पंचायत अध्यक्ष ओमकर गुप्ता की याचिका पर हाईकोर्ट ने सुप्रीम कोर्ट का हवाला देते हुए चुनाव याचिकाओं पर धारा 5 लागू न होने की विशेष टिप्पणी करते हुए 15 नवंबर के जनपद न्यायालय के चुनाव रद्द करने के आदेश को निरस्त कर दिया। जिसके साथ आनन फानन मे अध्यक्ष पद रिक्त करने के जिला अधिकारी के आदेश भी स्वत: समाप्ति हो जाने की खबरों को सुनते ही नगर पंचायत अध्यक्ष ओंकार गुप्ता के समर्थक इस सत्य की जीत बताने लगे। समर्थकों का मानना है कि नगर पंचायत अध्यक्ष ओमकार गुप्ता ने अवैध अतिक्रमण व भ्रष्टाचार के विरुद्ध चलाया जा रहे अभियान को रोकने के लिए अतिक्रमणकारियों एवं विरोधियों के द्वारा समय-समय पर कुचक्र रचकर उन्हें परेशान किया जा रहा है। और जिला प्रशासन नगर क्षेत्र में हुए अवैध अतिक्रमण के मामले में न्यायालय एवं शासन की जीरो टॉलरेंस की नीति को आइना दिखा रहा है।