अयोध्या। शारदीय नवरात्र का प्रथम दिवस अयोध्या में भोर होते ही श्रद्धा का जनसैलाब उमड़ पड़ा। आस्था से सराबोर जनमानस माँ दुर्गा के प्रथम स्वरूप शैलपुत्री की आराधना में लीन दिखा। रामलला की नगरी इस दिन माँ शक्ति के जयकारों से गुंजायमान रही।
सुबह से ही बड़ी देवकाली मंदिर जो भगवान श्रीराम की कुलदेवियाँ मानी जाती हैं तथा माता सीता द्वारा पूजित माता छोटी देवकाली में श्रद्धालुओं की लंबी कतारें लगी रहीं। दर्शनार्थियों ने आरती-पूजन के साथ पुष्प, प्रसाद और दीप अर्पित कर माता से सुख-समृद्धि की कामना की। मंदिरों को सैकड़ों दीपों और रंग-बिरंगी विद्युत झालरों से सजाया गया, संध्या बेला पूरा शहर दुर्गापूजा की रंगबिरंगी लाइटों की अद्भुत आभा से आलोकित हो रहा है।
रामनगरी के कोने-कोने में आस्था का उन्मेष स्पष्ट दिखाई दिया। गुप्तारघाट स्थित मरी माता मंदिर हो या कैंट क्षेत्र का पाटेश्वरी माता धाम, मकबरा का शीतला मंदिर हो अथवा नगर के अन्य देवी मंदिर सभी स्थानों पर भक्तों का रेला उमड़ पड़ा। हर ओर माता रानी के चरणों में शीश नवाते श्रद्धालु और “जय माता दी” के घोष से गूंजती गलियां आस्था की पराकाष्ठा का अनुभव करा रही थीं। नवरात्र पर्व की पवित्रता और विशाल जनसमूह को देखते हुए प्रशासन ने सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम किए हैं। पुलिस बल मंदिरों के आस-पास भ्रमण कर श्रद्धालुओं को निश्चिंत वातावरण प्रदान कर रहा है। रामनगरी की इस पावन छवि में आज धर्म और अध्यात्म का संगम दिखाई देता है। मानो स्वयं माँ शैलपुत्री ने अपने दिव्य आभामंडल से संपूर्ण नगरी को आलोकित कर दिया हो। भक्तों की श्रद्धा और भक्ति रस में डूबी यह नगरी नवरात्र के प्रथम दिन सचमुच आस्था की राजधानी बन उठी।