अयोध्या। सुप्रीम कोर्ट द्वारा सेवा में कार्यरत शिक्षकों और पदोन्नति के लिए टीईटी (शिक्षक पात्रता परीक्षा) को अनिवार्य करने के आदेश के खिलाफ शुक्रवार को परिषदीय शिक्षक सड़कों पर उतर आए। उत्तर प्रदेशीय प्राथमिक शिक्षक संघ के बैनर तले तिकोनिया पार्क से निकाले गए जुलूस में सैकड़ों शिक्षक शामिल हुए। जिलाध्यक्ष डॉ. संजय सिंह के नेतृत्व में नारेबाजी करते हुए यह जुलूस तहसील सदर पहुंचा, जहां पुलिस से हल्की नोकझोंक भी हुई। बाद में सिटी मजिस्ट्रेट के माध्यम से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान को ज्ञापन भेजा गया।
ज्ञापन में कहा गया कि 29 जुलाई 2011 से पूर्व नियुक्त शिक्षकों को टीईटी में घसीटना असंवैधानिक है। दशकों से पढ़ा रहे शिक्षकों की योग्यता पर सवाल उठाना न केवल अन्याय है, बल्कि सरकारी शिक्षा व्यवस्था को भी कमजोर करेगा। जिलाध्यक्ष डॉ. संजय सिंह ने चेतावनी दी कि यदि शीघ्र ठोस निर्णय नहीं लिया गया तो आंदोलन अंतिम चरण में पहुंचेगा और “मजबूरी में आत्मदाह जैसा कदम भी उठाना पड़ेगा।”
जिला मंत्री प्रेम वर्मा ने कहा कि सरकार ने पुराने शिक्षकों को टीईटी अनिवार्यता से मुक्त न किया तो आंदोलन उग्र होगा। राज्य संयुक्त कर्मचारी संघ के जिलाध्यक्ष अरविंद सिंह ने शिक्षको के इस आंदोलन को दिया समर्थन और कहा कि शिक्षकों की मांग को केंद्र सरकार अध्यादेश लाकर इस काले कानून से मुक्त करे। उत्तर प्रदेश के प्राथमिक शिक्षक संघ के प्रांतीय उपाध्यक्ष विश्वनाथ सिंह ने कहा कि जब बिना टीईटी के नियुक्त शिक्षकों ने लाखों बच्चों को शिक्षा दी और वे बच्चे आज सफल पदों पर कार्यरत हैं, तो अचानक से इन शिक्षकों की योग्यता पर सवाल क्यों उठाए जा रहे हैं।
मौके पर उत्तर प्रदेश के प्राथमिक शिक्षक संघ बीकापुर ब्लॉक अध्यक्ष प्रिया कांत पांडे, द्वारकाधीश उपाध्याय, गुलाब चंद्र, चन्द्र शेखर सिंह, राजेश कुमार, रजनी यादव, अखिलेश कुमार, बीनू चौधरी, विनीता सिंह, अशोक यादव, आलोकेश रंजन, रंजीत सिंह, नवनीत सिंह, जितेंद्र तिवारी, शिव शंकर सोनी, संत शरण सिंह, मोहित मौर्य, देवेंद्र प्रताप सिंह, संदीप सिंह, राज नारायण सिंह, राम जी सिंह, विकास सिंह, प्रदीप सिंह, सहित बडी संख्या में शिक्षक मौजूद रहे।