Sunday, March 8, 2026
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अपर्याप्त नींद से बढ़ रहा स्लीप-डिप्राइव्ड सिन्ड्रोम – डा. मनदर्शन


अयोध्या। विश्व निद्रा-मनो जागरूकता सप्ताह पर कैंट कम्युनिटी-अवेयरनेस गोष्ठी में डा आलोक मनदर्शन ने बताया कि पर्याप्त नींद के लिए मस्तिष्क में पर्याप्त मेलाटोनिन मनोरसायन का होना आवश्यक है। परन्तु इंटरनेट स्क्रीन एक्सपोजर या अन्य मनोकारको के कारण देर तक जागने से तनाव बढ़ाने वाले मनोरसायन कार्टिसॉल बढ़ जाने से नींद तो दुष्प्रभावित होती  है तथा उत्साह व फ्रेशनेस वाले मनोरसायन सेराटोनिन कम हो जाता है जिससे सुबह चुस्त दुरूस्त न होकर निष्तेज व थकी-मादी होती है ।

डा आलोक मनदर्शन

 दुष्प्रभाव व लक्षण : अपर्याप्त नींद से शरीर की प्रतिरोधक क्षमता, पाचन क्रिया,हार्मोन संतुलन व हृदय तंत्र दुष्प्रभावित होता है । मोटापा,मधुमेह,हृदय रोग, थकान, एकाग्रता की कमी, मूड स्विंग, चिड़चिड़ापन,गुस्सा  चैतन्यता मे कमी ,भूख मे  गड़बड़ी, प्रतिरोधी  क्षमता मे कमी, उच्च रक्तचाप, अवसाद व उन्माद जैसे रोगो को जन्म दे सकता है।

बचावः  सोने से 30 मिनट पूर्व ही स्क्रीन एक्सपोजर से बचें तथा नकारात्मक विचार से दूरी व आत्म-सन्तुष्टि के मनोभाव से कुछ मनोरंजक या सुगम- संगीव या आडिओ-बुक आदि के माध्यम से नींद को हावी होने दें। यदि लगातार 15 दिनों तक नींद बहुत देर से आये या बहुत जल्द खुल जाये तो स्लीप-थिरेपिस्ट या मनोविशेषज्ञ से सलाह लें। नींद की आवश्यकता उम्र के साथ घटती जाती है।


किस आयु में कितनी नींद है आवश्यक


4 माह से 12 माह के शिशु को 12 से 16 घंटे,

1 वर्ष से 2 वर्ष में 11से 14 घंटे,

3 से 5 वर्ष में 10 से 13 घंटे,

6 से 12 वर्ष में 9 से 12 घंटे,

13 से 18 वर्ष में 8 से 10 घंटे,

18 वर्ष से ऊपर 7 से 8 घंटे

60 वर्ष से उपर 5 से 6 घंटे की नींद आवश्यक है।

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