उन्होंने कहा कि हमने देश में आपातकाल भी देखा। सत्ता के खिलाफ एक शब्द लिखने वाले पत्रकार को जेल में डाल दिया। लोकतंत्र को मजबूत करने के लिए पत्रकार अपनी भूमिका का निर्वाहन करता रहा है। उन्होंने कहा कि जहां हर क्षेत्र में गिरावट आयी है। राजनीति पहले से बदल कर अब स्वार्थ की हो गई है। अधिकारियों के काम करने का तरीका बदल गया है। उससे पत्रकारिता भी अछूती नहीं रह गयी है। आज पत्रकारिता का व्यवसायीकरण हो गया है। मुख्य अतिथि सांसद लल्लू सिंह ने कहा कि स्वर्गीय राजेंद्र प्रसाद पाण्डेय का चरित्र, जुझारूपन वर्तमान पत्रकारों के लिए पथ प्रदर्शक की भांति है। उन्होंने सत्य को हमेशा सत्य की तरह परिभाषित किया।