◆ महिलाओं के लिए ऑन-स्पॉट काउंसलिंग कौशल विकसित करने पर कार्यशाला
अयोध्या। महिलाओं को त्वरित सहायता, संरक्षण और मार्गदर्शन उपलब्ध कराने के उद्देश्य से पुलिस लाइन सभागार में मिशन शक्ति केंद्रों की सेवा प्रदाता टीम के लिए एक विशेष कार्यशाला का आयोजन किया गया। कार्यशाला के प्रस्तावना संबोधन में क्षेत्राधिकारी सदर अरविन्द सोनकर ने बताया कि यह प्रशिक्षण सत्र महिला एवं बाल सुरक्षा संगठन के अतिरिक्त पुलिस महानिदेशक के आदेशों के अनुपालन में तथा वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक के निर्देशन एवं पुलिस अधीक्षक ग्रामीण के संयोजन में आयोजित किया गया है।
उन्होंने बताया कि पुलिस थानों में स्थापित मिशन शक्ति केंद्रों पर कार्यरत टीम को जरूरतमंद महिलाओं के लिए साइकोलॉजिकल फर्स्ट–एड एवं मेंटल रिहैबिलिटेशन का प्रशिक्षण दिया गया, जिससे ऑन-स्पॉट काउंसलिंग स्किल्स का विकास हो सके और पीड़िताओं को तत्काल राहत प्रदान की जा सके।
सत्र के तकनीकी वक्ता जिला प्रोबेशन अधिकारी द्वय ने बताया कि मिशन शक्ति-5 का उद्देश्य महिलाओं और किशोरियों की सुरक्षा, संरक्षण, सशक्तिकरण और आत्मनिर्भरता से जुड़ी योजनाओं को एकीकृत करना है। इसके अंतर्गत उत्तर प्रदेश सरकार के अभियान तथा केंद्र सरकार के महिला एवं बाल विकास मंत्रालय के तहत संचालित ‘संबल’ और ‘सामर्थ्य’ दो कार्यक्षेत्र वाले अम्ब्रेला मिशन शामिल हैं।
सत्र के वैज्ञानिक वक्ता डॉ. आलोक मनदर्शन ने आपदा अथवा संकट की स्थिति में पीड़ित महिलाओं की मानसिक अवस्था को समझने पर बल दिया। उन्होंने सिंपैथी, इम्पैथी और अपैथी के अंतर को स्पष्ट करते हुए फर्स्ट-एड काउंसलिंग के प्रमुख सिद्धांत—स्वीकार्यता, गोपनीयता, समानुभूति, भावसम्मत संवाद, व्यक्ति-सापेक्षता और निर्णय-निरपेक्षता—पर विस्तार से प्रकाश डाला। साथ ही सशक्तिकरण के तीन आयाम माइंड, मैटेरियल और माइट पर चर्चा की।
उन्होंने पुलिस कर्मियों को कार्य-तनाव से उत्पन्न मानसिक थकान और बर्न-आउट से निपटने के लिए पर्याप्त नींद तथा सकारात्मक गतिविधियों को अपनाने की सलाह दी। कार्यशाला का धन्यवाद ज्ञापन महिला थानाध्यक्ष आशा शुक्ला ने किया।