◆ राष्ट्र की अखंडता, गोसंरक्षण और सनातन संस्कृति की रक्षा का संदेश
अयोध्या। राष्ट्र की अखंडता और सनातन संस्कृति की रक्षा के संकल्प के साथ 7 नवंबर से सनातन हिंदू एकता पदयात्रा दिल्ली से आरंभ होगी, जो 16 नवंबर को वृंदावन स्थित बांके बिहारी मंदिर पहुंचकर संपन्न होगी। इस यात्रा की घोषणा अयोध्या धाम की तपस्वी छावनी के जगद्गुरु परमहंसाचार्य ने प्रेस वार्ता के दौरान की।
उन्होंने बताया कि यह पदयात्रा किसी विरोध के लिए नहीं, बल्कि राष्ट्र को एकजुट करने और सनातन मूल्यों के संरक्षण का प्रतीक है। यात्रा का मुख्य उद्देश्य भारत को संवैधानिक रूप से हिंदू राष्ट्र घोषित कराना, गोवंश को राष्ट्रीय धरोहर का दर्जा दिलाना और रामचरितमानस को राष्ट्रीय ग्रंथ के रूप में मान्यता दिलाना है। जगद्गुरु परमहंसाचार्य ने कहा कि इस यात्रा के माध्यम से देश के संत, महात्मा और धर्मप्रेमी नागरिक एक स्वर में यह संदेश देंगे कि सनातन संस्कृति ही भारत की आत्मा है। उन्होंने सभी संतों और श्रद्धालुओं से इसमें भाग लेने की अपील की।
उन्होंने 7 नवंबर 1966 की ऐतिहासिक घटना को याद करते हुए कहा कि उस दिन देशभर से लाखों साधु-संत, किसान और माताएँ–बहनें दिल्ली में गौहत्या बंद करने की मांग लेकर संसद भवन के सामने एकत्र हुए थे, लेकिन तत्कालीन शासन ने उन पर गोलियां चलवाकर कई निर्दोषों की जान ले ली थी। कहा कि उस समय हमारी आवाज़ दबा दी गई थी, पर अब हम फिर उसी संकल्प के साथ उठ खड़े हुए हैं। राष्ट्र और धर्म की रक्षा के लिए यदि प्राण भी न्योछावर करने पड़ें, तो पीछे नहीं हटेंगे।
इस पदयात्रा में देशभर के प्रमुख संत-महात्मा, धर्माचार्य और सनातन प्रेमी नागरिकों के शामिल होने की संभावना है। यात्रा के दौरान विभिन्न पड़ावों पर धर्मसभा और भक्ति-सांस्कृतिक कार्यक्रम भी आयोजित किए जाएंगे।