@ बिपिन सिंह
पूराबाजार, अयोध्या । भगवान शिव ने भक्तों के कल्याण के लिए लिंग (प्रतीक) रूप में स्वयं को प्रकट किया है। इन द्वादश ज्योतिर्लिंगों के नाम का स्मरण नियमित रूप से करने वालों को शिवलोक में स्थान प्राप्त होता है। साथ ही जो भक्त द्वादश ज्योतिर्लिंगों का दर्शन कर लेता है, वह भी पापमुक्त होकर शिवभक्ति का प्रसाद पा लेता है।
इसी भावना के साथ मध्य प्रदेश के देवास जिले के विद्याधाम आश्रम से 12 मई 2025 को 12 ज्योतिर्लिंगों की 17,000 किलोमीटर लंबी पदयात्रा पर निकली 48 वर्षीय दीदी साध्वी रामानंद चैतन्य आज अपनी यात्रा के 97वें दिन रामजानकी मंदिर, बाकरगंज बाजार में श्रद्धालुओं को संबोधित कर रही थीं। उन्होंने बताया कि ज्योति का अर्थ है प्रकाश और लिंग का अर्थ है प्रतीक। ज्योतिर्लिंग भगवान शिव के प्रकाश के प्रतीक हैं, जो दिव्य ऊर्जा और शक्ति का प्रतिनिधित्व करते हैं। इन 12 स्थानों पर भगवान शिव स्वयं ज्योति रूप में प्रकट हुए थे।
इस बारह ज्योतिर्लिंगों की पदयात्रा में 21 राज्यों और चार धाम की यात्रा भी पूरी होगी। साध्वी ने बताया कि इस पवित्र पदयात्रा का उद्देश्य भगवान शिव का आशीर्वाद प्राप्त कर पापों से मुक्ति और मोक्ष की प्राप्ति करना है। उन्होंने कहा कि 12 ज्योतिर्लिंगों की यात्रा भारत की समृद्ध धार्मिक और सांस्कृतिक विरासत का हिस्सा है।
अयोध्या में सरयू स्नान के बाद साध्वी ने रामवंशज कुश द्वारा स्थापित नागेश्वरनाथ मंदिर में शीश नवाया। इसके बाद हनुमानगढ़ी, कनक भवन और रामजन्मभूमि पर रामलला के दर्शन किए। उन्होंने कहा कि इन दर्शनों से उनका और उनके 72 वर्षीय पिता दयाराम का जीवन धन्य हो गया।
रामनगरी अयोध्या से दर्शन उपरांत साध्वी शिवनगरी बनारस के लिए रवाना हुईं। गोसाईगंज के महादेवा घाट मंदिर पर रात्रि विश्राम कर अगले दिन भोर में पदयात्रा पुनः बनारस की ओर प्रस्थान करेगी।