Saturday, March 7, 2026
HomeAyodhya/Ambedkar Nagarअयोध्यागुरु पूर्णिमा पर श्रद्धा, भक्ति और परंपरा से सराबोर हुई रामनगरी

गुरु पूर्णिमा पर श्रद्धा, भक्ति और परंपरा से सराबोर हुई रामनगरी


सरयू में डुबकी लगाकर भक्तों ने किया गुरु पूजन, एक हजार से अधिक मंदिरों में महोत्सव की धूम


अयोध्या। गुरु पूर्णिमा पर गुरुवार को रामनगरी अयोध्या आस्था, श्रद्धा और भक्ति के रंग में रंगी रही। भोर होते ही लाखों श्रद्धालु सरयू घाटों पर उमड़ पड़े। स्नान के बाद भक्तों ने नागेश्वरनाथ महादेव, रामजन्मभूमि, हनुमानगढ़ी, कनक भवन सहित रामनगरी के मंदिरों में पूजा-अर्चना की। मंदिरों व आश्रमों में शिष्यों द्वारा गुरु पूजन की पारंपरिक विधि के साथ महोत्सव मनाया गया।



दशरथ महल में महंत देवेंद्र प्रसादाचार्य ने अपने पूर्वाचार्य का पूजन कर भगवान श्रीराम की आरती उतारी। लक्ष्मण किला के महंत मैथिलीरमण शरण ने अपने गुरु स्वामी सीताराम शरण के चित्रपट का पूजन कर श्रद्धांजलि अर्पित की। शशिकांत दास महाराज राम कचहरी, महंत ज्ञानेंद्र महाराज,महामंडलेश्वर मदन मोहन दास महाराज जानकी निवास प्रमोद वन, महंत जयराम दास, महंत रामशंकर दास, महंत रामनरेश शरण, महंत करुणा निधान शरण, महंत रामप्रियाशरण गिरधारी, महंत देवेंद्र प्रसादाचार्य, तीन कलश तिवारी मंदिर के महंत गिरीशपति त्रिपाठी सहित सभी प्रमुख पीठों के संतों ने अपने गुरु का पूजन कर शिष्यों को आशीर्वाद दिया।



हनुमानगढ़ी में पूर्व अखाड़ा परिषद अध्यक्ष महंत ज्ञानदास जी महाराज का शिष्यों ने पूजन किया। उनके उत्तराधिकारी महंत संजय दास ने अपने गुरु का पूजन कर सभी को आशीर्वाद दिया। मणिरामदास छावनी, दशरथ महल, श्रीरामवल्लभाकुंज, रंगमहल, लक्ष्मण किला, सियाराम किला, कोसलेश सदन, तुलसीदास छावनी सहित प्रमुख मंदिरों में सुबह से ही भक्तों की भीड़ उमड़ पड़ी।



रामलला सदन के जगदगुरु डॉ. राघवाचार्य ने व्यास पूर्णिमा का महत्व बताते हुए कहा, “गुरु ही आत्मा को परमात्मा से जोड़ने वाला तत्व है।हनुमत निवास के आचार्य डॉ. मिथिलेश नंदिनी शरण ने कहा, “गुरु हमारे जीवन के अंधकार को मिटाकर ज्ञान का प्रकाश देते हैं।

सियाराम किला, तुलसीदास जी की छावनी, अशर्फी भवन, लाल साहब दरबार, श्रीराम आश्रम, करुणा निधान भवन, रामलला सदन, श्रीरामकृष्ण मंदिर, रसमोदकुंज, जानकी घाट बड़ास्थान, विद्याकुंड, सुग्रीव किला, दिव्य कला कुंज सहित सैकड़ों मंदिरों में दिनभर गुरु पूजन चलता रहा।

गुरु-शिष्य परंपरा की जीवंत झलकियों से सजी अयोध्या ने गुरु पूर्णिमा के दिन आस्था और परंपरा का अनुपम संगम देखा, जहां श्रद्धालु न केवल अपने गुरु का पूजन कर उनका आशीर्वाद लेने पहुंचे, बल्कि संतों से आध्यात्मिक ज्ञान भी प्राप्त किया।

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