अयोध्या। रमजान के पवित्र महीने की शुरुआत के साथ ही लोगों की दिनचर्या में सकारात्मक बदलाव देखने को मिलते हैं, जिनका प्रभाव मानसिक और शारीरिक स्वास्थ्य पर भी पड़ता है। जिला चिकित्सालय के मनोविश्लेषक डा. आलोक मनदर्शन ने बताया कि रोज़ा और नमाज़ केवल आध्यात्मिक अभ्यास नहीं हैं, बल्कि इनके वैज्ञानिक और मनोवैज्ञानिक लाभ भी हैं।
उन्होंने बताया कि रोज़ा रखने और नियमित इबादत करने से तनाव बढ़ाने वाला हार्मोन कॉर्टिसोल कम होता है, जबकि दिमाग को सुकून देने वाले हार्मोन जैसे सेरोटोनिन, गाबा, एंडोर्फिन और ऑक्सीटोसिन का स्तर बढ़ता है। इससे मन शांत रहता है और चिंता, अवसाद जैसी समस्याओं में कमी आती है। सामूहिक नमाज़ और इफ्तार के दौरान मिलने-जुलने से आपसी अपनापन बढ़ता है, जिससे मानसिक संतुलन और खुशी की भावना मजबूत होती है।
डा. मनदर्शन ने बताया कि रोज़ा इंटरमिटेंट फास्टिंग का एक सटीक उदाहरण है। आधुनिक चिकित्सा विज्ञान के अनुसार 12 से 14 घंटे तक नियंत्रित भोजन न करना मोटापा, उच्च रक्तचाप और मधुमेह जैसी लाइफस्टाइल बीमारियों में लाभकारी माना जाता है। रमजान में अपनाई जाने वाली अनुशासित दिनचर्या शरीर और मन दोनों को संतुलित रखने में सहायक होती है।
उन्होंने कहा कि जकात, खैरात और जरूरतमंदों की मदद करने से सकारात्मक भावनाएं विकसित होती हैं, जिससे तनाव कम होता है और मानसिक स्वास्थ्य बेहतर होता है। इस प्रकार रमजान का महीना आध्यात्मिक उन्नति के साथ-साथ मानसिक शांति और स्वास्थ्य के लिए भी लाभकारी सिद्ध होता है।