अयोध्या के रग रग में तो ओरछा की धड़कन में विराजमान हैं राजाराम-महंत हरिओम पाठक जी महाराज
राक्षसी, तामसी और सात्विक यज्ञ। मेघनाथ आदि राक्षसों के द्वारा स्वयं हित के लिए किया जाने वाला यज्ञ राक्षसी श्रेणी में आता है। दक्ष प्रजापति आदि के द्वारा अहम के लिए किया जाने वाला यज्ञ तामसी श्रेणी में आता है। सनातन धर्म की रक्षा एवं विश्व कल्याण के लिए ऋषि मुनियों के द्वारा किया जाने वाला यज्ञ सात्विकयज्ञ श्रेणी में आता है। वही कथा के पांचवें दिन कथा व्यास से संपूर्णानंद जी महाराज ने पांचवें दिन की श्री राम कथा का वर्णन किया। इससे पूर्व कथा में पहुंचने पर सभी संतों का मोतिगरपुर सिद्धेश्वर धाम के महंत कृष्णानंद एवं आयोजक टीम के सदस्यों ने माला व धर्म पट्टिका पहनकर स्वागत किया।अयोध्या धाम से आएं हुए आचार्य पंडित उमेश यज्ञ आचार्य पंडित मोरध्वज पांडेय आचार्य मोनू तिवारी पंडित विपिन शास्त्री मनोज तिवारी सहित लोग अपनी सराहनीय भूमिका निभा रहें हैं। कथा के पांचवें दिन हनुमान जयंती महोत्सव भी मनाया गया। जिसमें बालाजी सरकार राम भक्त हनुमान जी की आरती उतारी गई एवं प्रसाद का वितरण किया गया। कथा में मौजूद कथा प्रेमी भक्तों ने अपने-अपने घर से सजा कर लाई गई आरती की थाल से आरती उतारी। इस दौरान प्रभु श्री रामचंद्र जी, पवन सुत रामभक्त हनुमंत लाल सहित कई धार्मिक नारो से पूरा क्षेत्र गुंजयमान हो गया। कथा में वैश्य समाज के जिला अध्यक्ष नंदलाल जायसवाल ,विश्व हिंदू परिषद सत्संग प्रमुख श्याम बाबू गुप्ता, विद्यावती राजभर, राम यज्ञ दुबे, रमेश कुमार सहित काफी संख्या में राम कथा प्रेमी श्रद्धालु मौजूद रहे।