जलालपुर, अंबेडकरनगर। सरकार द्वारा झोलाछाप डॉक्टरों पर रोक लगाने के लिए समय-समय पर अभियान चलाए जाने के बावजूद जलालपुर नगर क्षेत्र में ऐसे अवैध चिकित्सकों का नेटवर्क खुलेआम फल-फूल रहा है। ताजा मामला जलालपुर नगर के वाजिदपुर मोहल्ले का है, जहां स्वास्थ्य विभाग की कथित मिलीभगत से बीते कई वर्षों से एक अवैध हड्डी अस्पताल संचालित किया जा रहा है। हैरानी की बात यह है कि अस्पताल संचालक के पास न तो किसी प्रकार की मान्यता प्राप्त मेडिकल डिग्री है और न ही क्लीनिक पर कोई पंजीकरण या सूचना बोर्ड लगाया गया है।
सूत्रों के अनुसार, संबंधित व्यक्ति स्वयं को हड्डी रोग विशेषज्ञ बताकर मरीजों का इलाज करता है। अस्पताल में न केवल दवाइयां दी जाती हैं, बल्कि प्लास्टर चढ़ाने जैसे जोखिम भरे कार्य भी धड़ल्ले से किए जाते हैं।
स्थानीय लोगों का कहना है कि अवैध अस्पताल के जरिए संचालक ने अकूत संपत्ति अर्जित की है। इसी कमाई से उसने लाखों रुपये खर्च कर एक पक्की बिल्डिंग भी खड़ी कर ली है, जिसमें वर्तमान में यह हड्डी अस्पताल चलाया जा रहा है। क्षेत्र में यह चर्चा आम है कि बिना किसी डिग्री और पंजीकरण के इतने वर्षों तक अस्पताल चल पाना, स्वास्थ्य विभाग की मेहरबानी के बिना संभव नहीं है।
सबसे चिंताजनक पहलू यह है कि इस अवैध अस्पताल में इलाज कराने वाले मरीजों की जान हमेशा खतरे में रहती है। गलत इलाज, गलत दवाइयों और अवैज्ञानिक तरीके से किए गए प्लास्टर से मरीजों को गंभीर नुकसान पहुंचने की आशंका बनी रहती है। इसके बावजूद स्वास्थ्य महकमा अब तक किसी ठोस कार्रवाई से बचता नजर आ रहा है।
जब इस पूरे मामले को लेकर जलालपुर के अधीक्षक, डॉक्टर जयप्रकाश से बात की गई तो उन्होंने कहा कि मामला उनके संज्ञान में आया है, जांच कराई जाएगी और जांच के आधार पर आवश्यक कार्रवाई की जाएगी।
फिलहाल, विभागीय बयान के बाद भी सवाल यह उठता है कि क्या वास्तव में झोलाछाप डॉक्टरों पर सख्त कार्रवाई होगी या फिर यह मामला भी कागजी जांच तक ही सीमित रह जाएगा।