Friday, March 6, 2026
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अयोध्या उत्सव में दिखाई दी लोकसंस्कृति व कला की झलक

  •  मणिरामदास छावनी में तीन दिवसीय अयोध्या उत्सव की हुई शुरुआत


  •  उत्सव में होगी रामकथा और रामायण परम्परा आधारित प्रवचनों की श्रंखला


अयोध्या। मणिरामदास छावनी स्थित श्रीराम सत्संग भवन में तीन दिवसीय अयोध्या उत्सव की शुरुआत हुई। उत्सव में लोकसंस्कृति व कला की झलक दिखाई दी। कार्यक्रम में रामकथा और रामायण परंपरा पर आधारित प्रवचनों की श्रृंखला देखने को मिलेगी।
उद्घाटन सत्र में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सह सरकार्यवाह डॉ. कृष्णगोपाल ने कहा कि हम सभी आनंद के वातावरण में हैं। वर्षों से हम इस क्षण की प्रतीक्षा कर रहे थे। अब मर्यादा पुरुषोत्तम श्रीराम के मंदिर का निर्माण हो चुका है। 22 जनवरी को मंदिर के उद्घाटन की तिथि निश्चित है। सारे विश्व में हिंदू समाज उत्साहित व आनंदित है।
उन्होंने कहा कि पिछले हजार वर्षों की यात्रा में कुछ दुष्ट प्रवृत्ति के सांप्रदायिकों ने यहां के मंदिरों का विध्वंश किया। हिंदुओं पर अत्याचारों की पराकाष्ठा की गई। किंतु राम का सहारा लेकर हिंदू समाज लड़ाई लड़ता रहा। कभी शांत होकर तो कभी उग्र होकर। हिंदुओं को इस्लाम स्वीकारने के लिए विवश किया गया। तीर्थ यात्रा पर टैक्स लगे। फिर, धर्म को सुरक्षित रखने का यत्न करना पड़ा। लोग मंदिर छोड़कर घर में सिमट गए थे और ऐसी विकट परिस्थिति से जो सबको उबारकर बाहर ले आया, उनका नाम श्रीराम है।
द्वितीय सत्र के मुख्य वक्ता हनुमत निवास अयोध्या के महंत आचार्य मिथिलेश नंदिनी शरण ने कहा कि भारतीय अवधारणा में मनुष्यता का जन्म अयोध्या से हुआ है। उसके पहले जो है वह मानव नहीं, मनु की संताने हैं। जिसे जन्म दिया गया है, उसको उसके स्वरूप रक्षा के योग्य बनाना भी अपेक्षित है। इसे अयोध्या ने दुनिया को पहली बार सिखाया और त्रेता में यह प्रमाणित किया कि मर्यादा पुरुषोत्तमिता एक दिन में नहीं आती। मर्यादा पुरुषोत्तम होना कोई आकस्मिक होने वाली घटना नहीं है।

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