अयोध्या। मार्च माह में मौसम तेजी से बदल रहा है। दिन में गर्मी बढ़ने लगी है, जबकि सुबह और शाम के समय हल्की ठंड बनी रहती है। इस तरह के मौसम परिवर्तन के कारण सर्दी-जुकाम, खांसी, गले में खराश, वायरल बुखार, एलर्जी, सिरदर्द और पेट से जुड़ी समस्याओं के मरीज बढ़ने लगते हैं। ऐसे में लोगों को अपने स्वास्थ्य के प्रति विशेष सतर्कता बरतने की जरूरत है।
यह जानकारी राजकीय डॉ. बृज किशोर होम्योपैथिक मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल, के प्राचार्य डॉ. आशीष कुमार सिंह ने दिया। उन्होंने बताया कि बदलते मौसम में शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता पर असर पड़ता है, जिससे संक्रमण का खतरा बढ़ जाता है। इसलिए संतुलित खान-पान, साफ-सफाई और नियमित दिनचर्या अपनाकर स्वास्थ्य को सुरक्षित रखा जा सकता है।
डॉ. सिंह ने सलाह दी कि इस मौसम में सुबह-शाम हल्के गर्म कपड़े पहनें और दिन में तेज धूप से बचाव करें। इसके साथ ही ताजे फल व सब्जियों का सेवन करें, पर्याप्त मात्रा में पानी पिएं और बासी व ठंडी चीजों से परहेज करें। नियमित व्यायाम और पर्याप्त नींद भी शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता को मजबूत बनाती है। उन्होंने बताया कि मौसमी बीमारियों के उपचार और बचाव में होम्योपैथी एक सुरक्षित और प्रभावी चिकित्सा पद्धति है। होम्योपैथिक दवाएं रोगी के लक्षणों के आधार पर दी जाती हैं, जो शरीर की प्राकृतिक रोग प्रतिरोधक क्षमता को बढ़ाने में सहायक होती हैं। मार्च माह में कुछ होम्योपैथिक औषधियां चिकित्सकीय सलाह से उपयोगी हो सकती हैं। इनमें एकोनाइटम नेपेलस (अचानक ठंडी हवा लगने से होने वाले सर्दी-जुकाम व बुखार में), बेलाडोना (तेज बुखार, सिरदर्द व गले की सूजन में), ब्रायोनिया एल्बा (सूखी खांसी और शरीर दर्द में), आर्सेनिकम एल्बम (एलर्जी, जुकाम व कमजोरी में) तथा जेल्सेमियम सेम्परविरेंस (वायरल बुखार, थकान और शरीर में भारीपन में) उपयोगी मानी जाती हैं।