अयोध्या। शहीद भगत सिंह स्मृति ट्रस्ट द्वारा शनिवार को नंद कॉन्वेंट स्कूल में संस्थापक शिक्षाविद स्वर्गीय राजेश नंद की पहली पुण्यतिथि पर उनकी स्मृति में “वर्तमानसमयमेंशिक्षाऔरजागरूकता” विषय पर एक विचार–गोष्ठी का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में शहर के बुद्धिजीवी, साहित्यकार, समाजसेवी, शिक्षा जगत से जुड़े लोग और बड़ी संख्या में विद्यार्थी उपस्थित रहे। सभी ने उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए उनके जीवन और योगदान को याद किया।
गोष्ठी को संबोधित करते हुए डॉ. विशाल श्रीवास्तव ने कहा कि राजेश नंद जी का जीवन और विचार कभी अलग नहीं हुए, वे आज भी एक वैचारिक चिंगारी की तरह हम सबके भीतर मौजूद हैं। साहित्यकार आशाराम जागरथ ने उन्हें सच्चे अर्थों में प्रगतिशील व्यक्तित्व बताते हुए कहा कि उन्होंने शिक्षा और समाज सुधार को ही जीवन का ध्येय बनाया। लेखक व चिंतक आर.डी. आनंद ने कहा कि नंद जी वंचित समाज के लिए निरंतर संघर्षरत रहे और शिक्षा को ही उनके उत्थान का साधन मानते थे।
समाजसेवी जे.पी. शास्त्री ने कहा कि नंद जी संविधान को सर्वोपरि मानते थे और शिक्षित समाज के निर्माण के लिए मौलिक अधिकारों की समझ को जरूरी बताते थे। एसबीआई के पूर्व अधिकारी बृजेश श्रीवास्तव ने शिक्षा के क्षेत्र में उनके योगदान को अविस्मरणीय बताया।
कार्यक्रम के संयोजक व ट्रस्ट के चेयरमैन सत्यभान सिंह जनवादी ने कहा कि राजेश नंद जी के निधन से शिक्षा के क्षेत्र में अपूरणीय क्षति हुई है। कवयित्री पूजा श्रीवास्तव ने अपने भावपूर्ण शब्दों में उन्हें याद किया, जबकि विद्यालय की प्रधानाचार्या मालती तिवारी ने नंद जी को स्नेहिल संरक्षक के रूप में स्मरण किया।
अंत में विद्यालय प्रबंधक रजनीकांत ने सभी का आभार व्यक्त किया। इस अवसर पर नंद परिवार के सदस्य, बुद्धिजीवी, समाजसेवी व गणमान्य नागरिक बड़ी संख्या में मौजूद रहे।