अयोध्या। डॉ. राममनोहर लोहिया अवध विश्वविद्यालय के समाज कार्य विभाग में मानसिक स्वास्थ्य जागरूकता कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कार्यक्रम के मुख्य वक्ता डॉ. आलोक मनदर्शन ने कहा कि अज्ञानता, संकोच, सामाजिक कलंक और अंधविश्वास मानसिक स्वास्थ्य सेवाओं तक पहुंचने में प्रमुख बाधाएं हैं। जागरूकता, संवेदनशील संवाद, समय पर उपचार और सामाजिक सहयोग के माध्यम से इन बाधाओं को दूर किया जा सकता है।
उन्होंने कहा कि मानसिक विकारों की शुरुआत अक्सर किशोरावस्था और युवावस्था में ही हो जाती है। ऐसे में मानसिक स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं को छिपाने या कमजोरी समझने के बजाय उनके लक्षणों को पहचानना और समय रहते विशेषज्ञ की सहायता लेना जरूरी है। सामाजिक कलंक और अंधविश्वास के कारण अनेक लोग उपचार से वंचित रह जाते हैं।
डॉ. मनदर्शन ने युवाओं में बढ़ते मानसिक तनाव के कारणों पर चर्चा करते हुए कहा कि पढ़ाई का दबाव, करियर की चिंता, अभिभावकों की अपेक्षाएं, प्रेम संबंधों में संघर्ष, अकेलापन, अपराधबोध, हताशा, आर्थिक कठिनाइयां, नशे की लत और पारिवारिक विवाद मानसिक स्वास्थ्य को प्रभावित कर सकते हैं। इसके अलावा यौन शोषण, प्रियजन की मृत्यु, गंभीर बीमारी और जीवन की अन्य प्रतिकूल परिस्थितियां भी व्यक्ति के मानसिक स्वास्थ्य पर गहरा असर डाल सकती हैं।
आत्महत्या की बढ़ती समस्या पर चिंता व्यक्त करते हुए उन्होंने कहा कि निराशा, अवसाद और अत्यधिक तनाव से जूझ रहे युवाओं के प्रति संवेदनशीलता और सहानुभूति का व्यवहार अपनाना आवश्यक है। मानसिक परेशानी से गुजर रहे व्यक्ति की बात धैर्यपूर्वक सुनना, उसे दोष देने से बचना और जरूरत पड़ने पर मानसिक स्वास्थ्य विशेषज्ञ की मदद उपलब्ध कराना महत्वपूर्ण है।
विश्व मानसिक स्वास्थ्य दिवस की थीम के संदर्भ में उन्होंने मानसिक स्वास्थ्य से जुड़े अनुभवों को साझा करने, मिथकों और चुप्पी को तोड़ने तथा उपचार एवं सहयोग की संस्कृति विकसित करने पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि मानसिक स्वास्थ्य के प्रति जागरूकता बढ़ाकर लोगों को समय पर सहायता लेने के लिए प्रेरित किया जा सकता है।
कार्यक्रम के प्रारंभ में समाज कार्य विभाग के समन्वयक डॉ. दिनेश कुमार सिंह ने मुख्य वक्ता का स्वागत किया और मानसिक स्वास्थ्य जागरूकता की आवश्यकता पर प्रकाश डाला। अंत में डॉ. प्रभात सिंह ने धन्यवाद ज्ञापन प्रस्तुत किया।