Monday, March 9, 2026
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समारोह पूर्वक मनाई गई मौलाना अबुल कलाम आजाद की जयंती


जलालपुर अंबेडकर नगर। नगर स्थित मौलाना आजाद गर्ल्स इंटर कॉलेज में सोमवार को मौलाना अबुल कलाम आजाद की जयंती समारोह पूर्वक मनाई गई।मौलाना अबुल कलाम आज़ाद स्वतंत्र भारत के सिर्फ प्रथम शिक्षा मंत्री ही नहीं थे बल्कि वे भारत में शिक्षा की बुनियाद रखने वाली उच्च कोटि की संस्थाओं के ‛शिल्पकार’ भी थे।आज़ाद भारतीय स्वाधीनता संग्राम के महान स्वतंत्रता सेनानी के साथ-साथ उच्च कोटि के विद्वान,साहित्यकार और पत्रकार भी रहे हैं।
अबुल कलाम आज़ाद का जन्म 11 नवंबर, 1888 को मक्का शहर (सऊदी अरब) में हुआ।उनका वास्तविक नाम मुहिउद्दीन अहमद था।अपने पिता से आरंभिक शिक्षा प्राप्त करने के बाद आज़ाद मिस्र के प्रसिद्ध शिक्षा संस्थान जामिया अज़हर चले गए जहाँ उन्होंने प्राच्य शिक्षा प्राप्त की।आज़ाद जी को उर्दू, फ़ारसी, हिंदी, अरबी तथा अंग्रेज़ी भाषाओं में महारत हासिल हुई।आज़ाद एक दूरदर्शी विद्वान थे,उन्होंने 1950 के दशक में ही सूचना और तकनीक के क्षेत्र में शिक्षा पर ध्यान देना शुरू कर दिया। उन्होंने देश में आधुनिक शिक्षा पद्धति के लिये उल्लेखनीय कदम उठाए।शिक्षामंत्री के तौर पर उनके कार्यकाल में ही भारत में तकनीकी के महत्त्वपूर्ण शिक्षण संस्थान ‘इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ़ टेक्नोलॉजी’ का गठन किया गया।अखिल भारतीय तकनीकी शिक्षा परिषद (एआईसीटीई) और सेकेंडरी एजुकेशन कमीशन भी उन्हीं के कार्यकाल में स्थापित किया गया।जामिया मिल्लिया इस्लामिया विश्वविद्यालय की स्थापना में भी उनका अहम योगदान रहा।मौलाना आज़ाद महिलाओं और वंचित वर्ग की शिक्षा के ख़ास हिमायती थे। उनकी पहल पर ही भारत में 1956 में ‘विश्वविद्यालय अनुदान आयोग’ की स्थापना की गई।2 फ़रवरी, 1958 को राष्ट्रीय एकता के प्रतीक और आज़ादी के इस महानायक ने दिल्ली में अंतिम सांस ली।स्वाधीनता आंदोलन और सार्वजनिक जीवन में अविस्मरणीय योगदान के लिये 1992 में उन्हें ‘भारत रत्न’(मरणोपरांत) से सम्मानित किया गया। कार्यक्रम के मुख्य अतिथि विद्यालय प्रबंधक मौलाना मोहम्मद खालिद कासमी ने कहा कि मौलाना अबुल कलाम आजाद के यौमे वफात के मौके पर मैं आप लोगों से कहना चाहूंगा कि मौलाना अबुल कलाम आजाद के नक्शे कदम पर चल कर हिंदुस्तान के अंदर हिंदू मुस्लिम एकता को कायम करने का काम करें और हिंदुस्तान के हर नागरिक को अपना रिश्ता शिक्षा से जोड़ कर एक ऐसा हिंदुस्तान बनाना है जिसका सपना मौलाना अबुल कलाम आजाद ने महात्मा गांधी के साथ देखा था।कार्यक्रम में उपस्थित पैगाम फाउंडेशन अध्यक्ष मोहम्मद शाहिद जमाल ने मौलाना अब्दुल कलाम आजाद की जीवनी पर प्रकाश डाला।कार्यक्रम का संचालन विद्यालय के वरिष्ठ लिपिक जमशेद इकबाल ने किया।उक्त अवसर पर मरगूब अहमद,आमिना खातून,तज्यींन आएशा,शेर अब्बास,कुमार गौरव,सानिया सिराज,मौहम्मद अहमद,फरहीन फातिमा,हमना मरियम, हेरा फातमा,मोहम्मदी खातून,हलीमा सादिया,उमैजा मरियम,जिकरा मरियम,शशि कला विद्यालय के शिक्षक शिक्षिकाएं एवं गणमान्य लोग उपस्थित रहे।

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