@ बिपिन सिंह
पूरा बाजार, अयोध्या। राम मंदिर आंदोलन में योगदान करने वालों की सूची और कहानी बहुत लम्बी और अंतहीन है, और इसके बारे में लगातार तमाम तथ्य सामने आते जा रहे हैं। इसी क्रम में क्षेत्र के एक कारसेवक का नाम सामने आया है जिन्हें तत्कालीन विश्व हिन्दू परिषद अध्यक्ष अशोक सिंघल ने स्वंय गुलाबबाड़ी मैदान में समारोह पूर्वक सम्मानित किया था । तत्कालीन वह लाल अब 51 वर्ष के हो चुके हैं जो ग्राम दामोदरपुर निवासी कुलदीप पाण्डेय है। जिन्होने 30 अक्टूबर 1990 को ढाँचे के बीच वाले गुंबद पर चढ़ कर न सिर्फ केशरिया पताका फहरावा था बल्कि उसमें लगे लोहे के चाँद सितारा को भी तोड़ कर ले लाया थे।

30 अक्टूबर सन 1990 की तारीख थी, आज से करीब 34 वर्ष। उस समय राम मंदिर का आंदोलन अपने चरम पर था । देश के कोने-कोने से लाखों की संख्या में अति-उत्साही कारसेवक सरकारी बाधाओं को तोड़ते हुए अयोध्या में प्रवेश कर चुके थे। चारों दिशाओं से युवक-युवतियां , छात्र-छात्राएं , स्वंयसेवक , बेटियां व माताएं अयोध्या की ओर कूच कर रहे थे । मंदिर आंदोलन के नायक अशोक सिंघल के आह्वान पर बड़ी संख्या में कार सेवकों का जमावड़ा हो चुका था। आंदोलनकारी विहिप नेताओं गिरफ्तारी की तलवार लटक रही थी। अशोक सिंघल , विनय कटियार , ऋतंभरा सहित विहिप से जुड़े संतों की जमात उस समय अयोध्या में मौजूद थी । अशोक सिंघल संतों के साथ जत्थे का नेतृत्व कर रहे थे । इस दौरान जुनूनी आवेग में आ कर मात्र 17 वर्षीय कारसेवक कुलदीप पाण्डेय शहीद हुतात्मा रामकुमार एवं शरद कोठारी के साथ विवादित ढाँचे के बीच वाले गुंबद पर चढ़कर पहले तो छात्र कुलदीप ने लोहे के चाँद सितारे को तोड़ कर साथ रख लिया और तीनों साथियों ने मिलकर गुंबद पर भगवा ध्वज फहरा दिया।



