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Photo Caption: आपातकाल :: Photo Grapher : Ayodhya Samachar




🔸 मां के अंतिम संस्कार में शामिल नहीं हो पाये थे अवधेश



🔸 जार्ज की जुबानी जुल्म की कहानी सुन रो पड़े थे लोग



(Faizabad, 25 June), आपातकाल के दौरान जेल मे निरुद्ध रहे राजनीतिक बंदियों के साथ हुए जुल्म व मानसिक प्रताड़ना दिये जाने की कुछ बानगी हकीकत में बयां करने के लिए काफी है। फैजाबाद जेल में बंद रहने के दौरान अवधेश प्रसाद की मां का निधन हो गया। अवधेश प्रसाद ने मां के अंतिम संस्कार में शामिल होने का प्रार्थना पत्र दिया लेकिन प्रशासन ने अनुमति नहीं दी। अवधेश प्रसाद ने प्रार्थना पत्र में पुलिस कस्टडी में जेल से जाने और अंतिम संस्कार के बाद वापस जेल लौट आने की शर्त भी जोड़ी थी पर अनसुनी कर दी गयी। तीसरे दिन न्यायालय से पैरोल मिलने के बाद मां के अंतिम संस्कार वाले स्थल पर पहुंच कर अवधेश प्रसाद ने मां की राख ही माथे लगाकर और आंसू बहाकर आत्मसंतुष्टि की। ऐसे अनेक कार्यकर्ता थे जिनके परिवार मंे माता पिता भाई या अन्य के गम्भीर अस्वस्थ होने या दिवंगत होने की सूचना मिलने पर प्रशासन का कड़ा रुख बरकरार रहा। आपातकाल लागू होने के बाद हुई गिरफ्तारी के माह भर बाद तक किसी से मुलाकात नहीं होने दी गयी थी। बाद में हफ्ते में एक दिन परिवारी जनों के मुलाकात की छूट मिली तो मुलाकात के दौरान एलआईयू का पहरा रहता था।

            दूसरी बानगी है देश के ख्यातिलब्ध श्रमिक नेता जार्ज फर्नाडीज की जबानी आपबीती कहानी। अपातकाल खत्म होने के बाद 1978 में यहां हुए उपचुनाव के दौरान बतौर केन्द्रीय उद्योग मंत्री गुलाबबाड़ी के मैदान में सभा करने आये जार्ज फर्नाडीज ने आपातकाल के दौरान अपने व परिवारी जनों पर हुए जुल्म की दास्तांे सुनायी थी। बिहार के बहुचर्चित डायनामाईट कांड में फंसाये गये जार्ज फर्नाडीज की गिरफ्तारी के लिए इनके भाई को हिरासत में लिया गया। जार्ज ने भरी सभा मंे बताया था कि भाई को मारने पीटने व तरह तरह की प्रताड़ना दिये जाने के बाउजूद भाई ने इनका पता नहीं बताया था। तब पुलिस ने इनकी मां को घर से बुलवाया और भाई से शर्त रखी की जार्ज का पता बताओं या इस महिला से दुराचार करों जार्ज फर्नाडीज ने आंसुओं के झरने के बीच भरी सभा में कहा कि हमारा भाई यातना और जुल्म से नहीं टूटा लेकिन मां के साथ दुराचार करने की शर्त पर टूट गया। मेरा पता बता दिया। तब मेरी गिरफ्तारी हुई। और मुझे भी जेल में अनेक तरह से प्रताड़ित कर यातनाएं दी गयी।