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(Ambedkar Nagar, 11 Mar), आगामी 17 मार्च से प्रारम्भ होने जा रहे माध्यमिक शिक्षा परिषद द्वारा संचालित हाई स्कूल और इण्टरमीडिएट की उत्तरपुस्तिकाओं के मूल्यांकन में वित्तविहीन शिक्षकों की बहिष्कार की घोषणा के चलते राजकीय और माध्यमिक शिक्षकों के साथ इनके भिड़ंत की संभावनाएं बलवती हैं। प्रशासन की चुप्पी हालातों को और भी संवेदनशील बनाती जा रही है।

 ज्ञातव्य है पिछली प्रदेश सरकार द्वारा महज़ एक सत्र के लिए वित्तविहीन शिक्षकों को दिया गया प्रोत्साहन मानदेय भत्ता अब जहां वित्तविहीन शिक्षकों के लिए प्रतिष्ठा का प्रश्न बन गया है तो वहीं वित्तविहीन शिक्षकों द्वारा माध्यमिक और राजकीय शिक्षकों को नज़रन्दाज़ किया जाना भी इन पर सदा से भारी पड़ता रहा है।गौरतलब है कि वर्तमान सरकार ने यद्द्पि मानदेय के नाम पर 100 करोड़ का  भारी भरकम बजट स्वीकृत किया है तथापि वित्तविहीन विद्यालयों के प्रबंधनों की मनमानी से अपने खास लोगों को ही उपकृत किये जाने से असल वित्तविहीन शिक्षक भत्ते से वंचित हैं।विडम्बना तो ये है कि इन शिक्षकों का असल शोषण कोई और नहीं इनके प्रबन्धन ही करते हैं और मजेदार तथ्य यह है कि वित्तविहीन शिक्षक संघ के नेता स्वयम शिक्षक की जगह विद्यालयों के प्रबंधकगण ही हैं।ऐसे में वित्तविहीन शिक्षकों की मांगों के नाम पर चलाया जाने वाला आंदोलन उनके प्रबन्धकों को उपकृत करने वाला आंदोलन बनता रहा है।कदाचित सरकार भी इस तथ्य से जहां अवगत है वहीं इन विद्यालयों के शिक्षक अपने भ्रष्ट प्रबंधनों के शोषण के खिलाफ आवाज़ बुलंद करने से कतराते हैं।यही कारण है कि अभी कोई भी वित्तविहीन विद्यालय मानदेय प्राप्त और वंचित शिक्षकों की सूची सार्वजनिक करने से कतराता रहा है क्योंकि इससे उनके विद्यालयों में बगावत के सुर उठने की संभावना होती है।ऐसे में जबकि विद्यालयों में पठन पाठन स्थगित सा चल रहा है और कि सभी विद्यालय आंतरिक गृह परीक्षाओं के साथ मूल्यांकन में व्यस्त होने जा रहे हैं तो वित्तविहीन शिक्षक संघ के प्रबन्धक पदधारी शिक्षक नेताओं द्वारा मूल्यांकन के बहिष्कार की घोषणा सोची समझी चॉल से कम कुछ नहीं है।यही नहीं वित्तविहीन संघ अबतो एडेड और राजकीय शिक्षकों की भी मांगों को अपने मांगपत्र में शामिल करते हुए इन शिक्षकों लर भी चालाकी से डोरे डाल रहा है।हालांकि ये बात दीगर है कि राजकीय और एडेड विद्यालयों के शिक्षक इसपर गौर नहीं करते।

  दिलचस्प बात ये है कि राजकीय और माध्यमिक शिक्षकों के भी मान्य प्रतिनिधि संघ हैं,जोकि मूल्यांकन का बहिष्कार नहीं कर रहे हैं।ऐसे में इन संघों के सभी परीक्षक उत्तरपुस्तिकाओं का मूल्यांकन करने हेतु अपनी उपस्थिति अवश्य दर्ज कराएंगे जबकि वित्तविहीन संघों के शिक्षक मूल्यांकन केंद्रों पर प्रवेशद्वार पर ही तालेबंदी तक कर सकते हैं।ऐसे में यदि राजकीय और एडेड शिक्षक मूल्यांकन में अनुपस्थित रहते हैं तो परिषद उनपर विभागीय कार्यवाही करेगी।जिस स्थिति से बचने के लिए ये शिक्षक हरहाल में मूल्यांकन केंद्रों में प्रवेश करते हुए मूल्यांकन करेंगे।फलतः दोनो पक्षों में कहीं कहीं भारी तो कहीं कहीं मामूली भिंडन्त की पूरी संभावना है।

 मूल्यांकन केंद्रों पर सुरक्षा के बाबत माध्यमिक शिक्षक संघ के पूर्व ज़िलामन्त्री उदयराज मिश्र के मुताबिक एक प्रतिनिधि मंडल जिलाधिकारी से भेंटकर वस्तुस्थिति से अवगत करायेगा।श्री मिश्र ने कहा है कि वित्तविहीन शिक्षकों की हरमाँग हेतु माध्यमिक शिक्षक संघ के अध्यक्ष ओम प्रकाश शर्मा सदन से सड़क तक संघर्ष कर रहे हैं।ऐसे में वित्तविहीन शिक्षकों को माध्यमिक संघ से कदम मिलाकर चलते हुए आंदोलन करना चाहिए।उन्होंने मुल्यांकर बहिष्कार के बाबत स्पष्ट शब्दों में कहा कि माध्यमिक शिक्षक मूल्यांकन कार्य करेंगे ताकि विद्यार्थियों के भाग्य से खिलवाड़ न हो।