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Photo Caption: Clipart :: Photo Grapher : Ayodhya Samachar

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डा लोहिया की मृत्यु से आहत सोशलिस्टों ने सरकार से वापस लिया था सर्मथन


फैजाबाद। आजाद भारत में 1967 में हुई कांग्रेस पार्टी में टूटन के बाद चैधरी चरण सिंह के मुख्यमंत्रित्व काल में उत्तर प्रदेश में बनी संविद्ध सरकार 1969 में सोशलिस्टों के सर्मथन वापसी के कारण गिर गई। कांग्रेस के चन्द्रभान गुप्ता पुनः उत्तर प्रदेश के मुख्मंत्री बने थे। सवा छ एकड जोत वाले किसानों की लगान माफी था डा लोहिया की बड़ी फ्रिक बडा मुद्दा। 12 अक्टूबर को दिल्ली के अस्पताल में डा. लोहिया ने संसार को अलविदा की तो भावुक सोशलिस्टों ने संविद्ध सरकार को गिराने की ठान ली।

       1967 में प्रदेश में बनी संविद्ध सरकार में शामिल सोशलिस्ट विधायक चुनाव में अपने-अपने घोषणा पत्र पर जीते चुनाव जीते थे। भारतीय क्रांति दल का चुनावी घोषणा पत्र अलग था।  सोशलिस्टों के घोषणा पत्र में यह बात शामिल भी कि अगर सरकार बनी तो सवा छह एकड जोत के किसानों का लगान माफ कर दिया जायेगा।  चैधरी चरण सिंह के मुख्यमंत्री बनने के बाद सरकार में शामिल सोशलिस्ट इस मांग को पूरा करने का आग्रह अक्सर चैधरी चरण सिंह से करते थे पर इसे मुख्यमंत्री टालते रहे।

संविद्ध सरकार में स्वास्थ्य मंत्री रहे व कालान्तर में फैजाबाद से सांसद रहे अनन्त राम जायसवाल बातते थे कि अक्टूबर 1968 में जब डा. लोहिया बीमार हुए तो उन्हें दिल्ली के अस्पताल में भर्ती कराया गया। बीमारी के दौरान भी वह यूपी के विधायकों व पार्टी के ओहदेदारों से सवा छह एकड जोत पर लगान माफी के बावत पूछते थे। उनकी हालत गंभीर होती जा रही थी। 10 अक्टूबर को डा. लोहिया ने कहा कि चरण सिंह लगान माफी कर देते तो वे आराम से मरते।

       डा. लोहिया की इस भावुक बात के बाद संविद्ध सरकार में शामिल मंत्री व विधायकों ने मुख्यमंत्री चैधरी चरण सिंह से मिलकर लगान माफी किए जाने का दबाव बनाया पर चैधरी नही माने। सोशलिस्ट विधायकों ने चरण सिंह से यहां तक कह दिया कि वे एलान कर दें, रेडियो पर खबर प्रसारित हो जाये। इसे डा. लोहिया सुन लें। बाद में विधान सभा का सत्र आने पर देखा जायेगा। सोशलिस्टों ने यह भी अनुरोध किया कि चूकिं डा. लोहिया की हालत गंभीर है और वे बार-बार चुनावी घोषणा पत्र में इस मांग के बावत जनता से किए गए वादे की याद कर पूरा कराने के लिए पार्टी के विधायकों से कह रहें है। गंभीर हालत में भी यह बात उनकी बेचैनी का कारण बनी। मांग पूरा होने के बावत एलान भर हो जाय तो उनको राहत मिल जाएगी। पर चैधरी चरण सिंह नही माने।

अनंतराम जायसवाल बताते थे कि 11 अक्टूबर की रात तक जब भी डा. लोहिया को होश आया वे यू.पी. के लोगों से सवा छः एकड जोत के किसानों की लगान माफी के बावत पूछते रहे। 12 अक्टूबर को जब डा. लोहिया का शरीर निष्प्राण हो गया तो वहां मौजूद राजनारायण, बिहार के तत्कालीन मुख्यमंत्री कर्पूरी ठाकुर, रामसेवक यादव, जनेश्वर मिश्र, अनंतराम जायसवाल, हरियाणा के मनीराम बागड़ी, जार्ज फर्नान्डीज आदि ने यह निश्चय किया कि संविद्ध सरकार से समर्थन वापस लेकर सरकार गिरा दी जाएगी। बताते है कि सोशलिस्टों ने भावुक क्षणों में यह शपथ भी ली थी कि जब भी, जैसे भी होगा राजनीतिक क्षितिज से चैधरी चरण सिंह का सूपड़ा साफ करने का जतन करते रहेंगे।

इसी फैसले के तहत डा. लोहिया की मृत्यु के गम से उबरते ही यू.पी. के विधायकों ने संविद्ध सरकार से समर्थन वापस ले लिया और सरकार गिर गई।

 


जनेश्वर मिश्र ने पी आखरी सिगरेट


अनंतराम जायसवाल ने बताया था कि चेन स्मोकर रहे जनेश्वर मिश्र ने डा0 लोहिया की सांसो की डोर थमने पर आंखो से बहती अश्रुधारा के बीच सिगरेट सुलगायी कुछ कश खीचें और सिगरेट फंेक दी उसके बाद उन्होनें कभी सिगरेट नही पी।