झरोखा अतीत का

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विदेशों में भी प्रथम पूज्य हैं गणपति : स्वामी शिवानंद महाराज

पूरा बाजार, फैजाबाद, 13 सितम्बर । देवगढ़ में विनायकी गणेश चतुर्थी महोत्सव में आये आध्यात्मिक गुरु स्वामी शिवानंद जी महाराज ने बताया कि गणाधिपति देवाधिदेव भगवान गजानंद को भारत में विद्या-बुद्धि , रिद्धि - सिद्धिदायक, विघ्नहर्ता एवं प्रथम पूज्यदेव के रुप में सभी पूजते हैं।


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भगवान शिव से वरदान पाकर शक्तिशाली हो गया था गजमुख

असुरों के राजा गजमुख को युद्ध के दौरान भगवान गणेश ने सदा के लिए चूहा बना दिया। भगवान गणेश उस पर बैठ गये तथा उसकी सवारी की। गजमुख बाद में आपने इस रुप से काफी प्रसन्न हुआ और आज भी भगवान की सवारी है और उसे सदा भगवान के चरणों में रहने का सौभाग्य प्राप्त हुआ है।


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एक लाख से अधिक श्लोक समाहित महाभारत महाकाव्य आज भी है दुनिया का सबसे बड़ा ग्र

महर्षि वेदव्यास द्वारा रचित महाभारत महाकाव्य को भगवान गणेश ने लिपिबद्ध किया था। एक लाख से अधिक श्लोको को अपने भीतर समेटे महाभारत महाकाव्य दुनिया का सबसे बड़ा ग्रंथ है। इस साहित्य को आज भी सबसे अनुपम कृतियों में एक माना जाता है।


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.....................अन्धन को आंख देते, बाझंन को पुत्र देत, निर्धन को माया

प्रथम पूज्य भगवान विघ्न विनाशक गणेश जी अपने भक्तों से बहुत जल्दी प्रसन्न हो जाते है। प्रसन्न होने पर भक्तों को मनोवांछित फल प्रदान करते है। यदि कोई सच्चे मन से गणेश जी वंदना करता है, तो गौरी सुत प्रसन्न होकर उसे आशीर्वाद प्रदान करते हैं।


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1893 में बालगंगाधर तिलक ने केसरीवाड़ा में विशाल गणेश महोत्सव की किया था शुरुवात

प्रथम स्वतंत्रता संग्राम के बाद विद्रोह को लेकर ब्रिटिश सरकार सतर्क हो गयी थी। सार्वजनिक मंचों पर भीड़ के इकठ्ठा होने पर रोक अंग्रेजों ने लगायी थी। सवाल था कि आम जनता तक आजादी के मंत्रों को कैसे पहुंचाया जाय। उस समय इसका तोड़ निकाला बाल गंगाधर तिलक ने।


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अपने आवास को बनाया छात्रावास खुद रहते थे छोटे कमरें में

अतीत से अनजान होने की हालत यह है कि दूसरों का ज्ञान का उजियारा दिखाने वाली जमात को बाहरी तो दूर इस धरती से जुड़े पुरोधा तक की सुधि नही है। आम दिनों में चर्चा न हो सामान्य सा है पर अवसर विशेष पर भी उस शख्सियत का जिक्र न हो जिसका नाम शिक्षा के क्षितिज पर ध्रुव तारे समान है।


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पूरी ताकत लगाने के बाद भी 12 वर्ष के बालक से दाढ़ी नहीं छुड़ा पाया अग्रेज, बाद में

आजादी के महासंग्राम में कूका आन्दोलन को स्वर्णाक्षरो में दर्ज किया गया है। आन्दोलनो से जुड़े आजादी के परवानों की शहादत उस समय अंग्रेजों की क्रूरता को दर्शाती है। मातृभूमि के प्रति हंसते हंसते अपना जीवन न्यौछावार करने वाले आन्दोलन से जुड़े बलिदानियों की कहानी आज भी धरती कह रही है।


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शिक्षक दिवस को शिक्षको के सम्मान व समाज में शिक्षा के प्रति चेतना जागृत करने

भारतीय संस्कृति के संवाहक, प्रख्यात शिक्षाविद्, महान दार्शनिक, एक आस्थावान हिन्दु विचारक के रुप में प्रसिद्ध डा सर्वपल्ली राधाकृष्णनन के जन्मदिन को भारत में शिक्षा दिवस के रुप में मनाया जाता है। डा राधाकृष्णनन भारत के प्रथम उपराष्ट्रपति तथा द्वितीय राष्ट्रपति रहे।


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चरवाहों के बीच पहाड़ी पर बैठकर राजा की तरह न्याय की बात करते चाणक्य को मिला था

शिक्षक की भूमिका एक सीढ़ी के समान होती है। जिस पर चढ़कर लोग जीवन की उचांइयों को छूते है। परन्तु सीढ़ी वहीं की रहती है। शिक्षक दिवस पर इतिहास के पन्नों पर नजर डालते हुए एक ऐसे शिक्षक की कहानी सुना रहे है।


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