अयोध्‍या समाचार विशेष

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भगवान अगस्त मुनि ने आकाश से आकर राम को दिया था आदित्य हृदय स्तोत्र का ज्ञान

(Ayodhya, 15 Jan), रावण के साथ संग्राम के अंतिम चरण में भगवान राम ने आदित्य हृदय स्तोत्र के द्वारा भगवान सूर्य की उपासना की थी। भगवान अगस्त मुनि ने इस गोपनीय स्तोत्र को राम को बताया था। युद्ध के दौरान थक चुके राम को स्तोत्र ने उर्जा प्रदान की।


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दान करने से मिलेगा विशेष फल, हर राशि के अगल दान का है प्राविधान

(Ayodhya, 12 Jan), पंडित देवमित्र पाण्डेय हरे दरवाजे वाले ने इस बार मकर संक्रान्ति के विषय में जानकारी देते हुए बताया कि जब सूर्य मकर राशि पर होकर उत्तरायण हो जाता है तो संक्रान्ति का पर्व मनाया जाता है। सूर्य एक मात्र प्रत्यक्ष देवता है। मकर संक्रान्ति पर सुबह 7.21 बजे से शाम 5.49 मिनट तक पुण्य काल रहेगा।


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संत बताते है कि मीर बांकी ने इन विग्रहो को किया था सरयू में प्रवाहित जो हुए थे

(Ayodhya, 8 Jan), सरयू तट स्थित कालेराम मंदिर। यहां स्थापित भगवान के विग्रह धार्मिक दृष्टि से जितने महत्वपूर्ण है उनकी ऐतिहासिक प्रसिद्धि भी उतनी ज्यादा है। मंदिर के व्यवस्थापको व संतो के अनुसार दो हजार वर्ष पूर्व राजा विक्रमादित्य ने अयोध्या अयोध्या की पुर्नस्थापना कर रामजन्मभूमि पर जिस श्रीरामपंचायतन के जिस विग्रह की स्थापना की थी।


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नवदुर्गा के सिद्धि और मोक्ष देने वाला स्वरूप है सिद्धिदात्री

नवदुर्गा के सिद्धि और मोक्ष देने वाले स्वरूप को सिद्धिदात्री कहते हैं। सिद्धिदात्री की पूजा नवरात्र के नौवें दिन की जाती है। देव, यक्ष, किन्नर, दानव, ऋषि-मुनि, साधक और गृहस्थ आश्रम में जीवनयापन करने वाले भक्त सिद्धिदात्री की पूजा करते हैं। इससे उन्हें यश, बल और धन की प्राप्ति होती है।


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आठवीं नवदुर्गा के रूप में पूजित है महागौरी

नवरात्र के आठवें दिन महागौरी की पूजा करने के विधान है। इस दिन मां की पूजा विधि-विधान के साथ करने से सभी परेशानियों से मुक्ति मिल जाती है। इतना ही नहीं अगर आपके शादी होने में किसी भी तरह की रुकावट आ रही है, तो इस दिन उन लोगों को जरुर पूजा करनी चाहिए।


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संसार में कालों का नाश करने वाली देवी ही है 'कालरात्री'

नवरात्री के सातवें दिन मां दुर्गा के कालरात्रि रूप की पूजा की जाती है। ये काल का नाश करने वाली हैं, इसलिए यह कालरात्रि कहलाती हैं। नवरात्रि के सातवें दिन इनकी पूजा और अर्चना की जाती है। संसार में कालों का नाश करने वाली देवी 'कालरात्री' ही है। कहते हैं इनकी पूजा करने से सभी दु:ख, तकलीफ दूर हो जाती है।


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नवदुर्गा का छठां रूप है माता कात्‍यायनी

नवरात्रि के छठे दिन आदिशक्ति श्री दुर्गा के छठे रूप कात्यायनी की पूजा-अर्चना का विधान है। महर्षि कात्यायन की तपस्या से प्रसन्न होकर आदिशक्ति ने उनके यहां पुत्री के रूप में जन्म लिया था। इसलिए वे कात्यायनी कहलाती हैं।


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आराधना से प्रसन्‍न होकर सुख-शांति देती है स्‍कंदमाता

श्री दुर्गा का पंचम रूप श्री स्कंदमाता हैं। श्री स्कंद (कुमार कार्तिकेय) की माता होने के कारण इन्हें स्कंदमाता कहा जाता है। नवरात्रि के पंचम दिन इनकी पूजा और आराधना की जाती है। इनकी आराधना से विशुद्ध चक्र के जाग्रत होने वाली सिद्धियां स्वतः प्राप्त हो जाती हैं।


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आयु, यश, बल व धन प्रदान करती है मॉ कूष्‍मांडा

नवरात्र में चतुर्थ दिन माँ कूष्मांडा की पूजा होती है जिससे आयु, यश, बल व धन प्राप्त होता है नवरात्रि में हर दिन मां के अलग-अलग रूपों की पूजा होती है जो खुशी, शांति, शक्ति और ज्ञान प्रदान करते हैं।माँ कूष्मांडा को प्रसन्न करने के लिए इस श्लोक का जाप करना चाहिए।


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मां चंद्रघंटा साधकों को देती है वीरता और निर्भयता का वरदान

नवरात्र के तीसरे दिन मां चंद्रघंटा की पूजा होती है। मां का यह रूप बेहद ही सुंदर, मोहक और अलौकिक है। चंद्र के समान सुंदर मां के इस रूप से दिव्य सुगंधियों और दिव्य ध्वनियों का आभासहोता है। मां का यह स्वरूप परम शांतिदायक और कल्याणकारी है।


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अनंत कोटि फल प्रदान करने वाली मां ब्रहचारिणी मां दुर्गा की नवशक्ति का दूसरा

नवरात्रि के दूसरे दिन मां ब्रह्मचारिणी की पूजा की जाती है। मां दुर्गा के उपासक और भक्त को अनंत कोटि फल प्रदान करने वाली मां ब्रहचारिणी मां दुर्गा की नवशक्ति का दूसरा स्वरूप है। माता ब्रह्मचारिणी का स्वरुप बहुत ही सात्विक और भव्य है। यहां ब्रम्ह का अर्थ तपस्या से है।


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वन्दे वांछितलाभाय चन्दार्धकृतशेखराम, वृषारूढां शूलधरां शैल

(Aalapur, Ambedkar Nagar, 21 Sep), नवरात्रि पूजन के पहले दिन मां दुर्गा के पहले स्वरूप माता शैलपुत्री का पूजन किया जाता है। ये ही नवदुर्गाओं में प्रथम दुर्गा हैं। पर्वत राज हिमालय के घर पुत्री रूप में उत्पन्न होने के कारण इनका नाम शैलपुत्री पड़ा।


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